डेम के गेट चोरी होने के बाद ग्रामीणों ने संभाली कमान, मिट्टी और गिट्टी से बनाया अस्थायी बांध

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बुरहान बंगड़वाला, खरडू बड़ी

झाबुआ जिले के खरडू बड़ी गांव से किसानों की परेशानी और ग्रामीणों की एकजुटता की तस्वीर सामने आई है। गांव की सापन नदी पर बने स्टाफ डेम के 22 गेट करीब एक वर्ष पहले, 15 जुलाई 2025 को चोरी हो गए थे। गेट चोरी होने के बाद से ही नदी में पानी रोकने की समस्या बनी हुई है, जिसका सीधा असर किसानों की सिंचाई व्यवस्था पर पड़ रहा है।

रबी एवं खरीफ की फसलों के लिए किसान नदी के पानी पर काफी हद तक निर्भर रहते हैं। गेहूं, चना, मक्का और कपास जैसी फसलों की सिंचाई के लिए किसान नदी में मोटर लगाकर खेतों तक पानी पहुंचाते हैं। लेकिन स्टाफ डेम के गेट नहीं होने के कारण नदी में पर्याप्त पानी जमा नहीं हो पा रहा है, जिससे किसानों के सामने सिंचाई का संकट खड़ा हो गया।

*पिछले वर्ष मिट्टी की थैलियों से रोका था पानी*

ग्रामीणों के अनुसार, पिछले वर्ष भी जब स्टाफ डेम के गेट चोरी होने के बाद शासन-प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई स्थायी समाधान नहीं मिला, तब गांव के सरपंच रमेश भुरजी डामोर के साथ ग्रामीणों और किसानों ने खुद मोर्चा संभाला था। ग्रामीणों ने मिट्टी से भरी थैलियां तैयार कर डेम के गेट की जगह लगाईं, ताकि नदी का पानी रोका जा सके और किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिल सके।

*इस वर्ष फिर ग्रामीणों ने मिलकर बनाया अस्थायी गेट*

इस वर्ष भी स्टाफ डेम के गेट की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने पर ग्रामीणों और किसानों ने एक बार फिर खुद पहल की। इस वर्ष बारिश कम होने के कारण किसानों को आने वाली फसलों की चिंता सता रही है। ऐसे में ग्रामीणों ने मिलकर डेम में पानी रोकने का प्रयास शुरू किया।

*इस बार ग्रामीणों ने बोरियों में गिट्टी भरकर उन्हें गेट की जगह लगाया*

जेसीबी,ट्रैक्टर और ग्रामीणों की मदद से डेम के आसपास आवश्यक स्थान पर गड्ढा तैयार किया गया और गिट्टी से भरी बोरियों को व्यवस्थित तरीके से लगाकर पानी रोकने का अस्थायी इंतजाम किया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी तरह नदी में पानी को रोककर किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना है, ताकि गेहूं, चना, मक्का, कपास सहित अन्य फसलों को समय पर पानी मिल सके।

*ग्रामीणों ने स्थायी समाधान की मांग*

ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और क्षेत्र की विधायिका एवं केबिनेट मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया एवं जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि स्टाफ डेम के चोरी हुए गेटों की जगह जल्द से जल्द नए गेट लगाए जाएं और समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। ताकि किसानों को सिचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी मिल सके।किसानों का कहना है कि हर वर्ष ग्रामीणों को अपने स्तर पर अस्थायी व्यवस्था करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

ग्रामीणों की यह पहल एक ओर जहां किसानों की मजबूरी को दर्शाती है, वहीं दूसरी ओर गांव के लोगों की एकजुटता और अपने क्षेत्र की समस्या के समाधान के लिए स्वयं आगे आने की भावना को भी सामने लाती है। ऐसे में जवाब देही राजनेताओं को भी सामने आना चाहिए और गांव के किसानों की समस्या को जल्द से जल्द हल करना चाहिए।

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