रेलवे स्टेशन पर उमड़ी भारी भीड़, सोयाबीन कटाई के लिए गुजरात-राजस्थान जा रहे ग्रामीण

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लोहित झामर, मेघनगर

त्योहारों का समय है, लेकिन आदिवासी अंचल के कई परिवारों के लिए यह समय अपनों के साथ खुशियां मनाने के बजाय रोजी-रोटी की तलाश में घर से दूर जाने का है। रोजगार के सीमित साधनों के चलते बड़ी संख्या में ग्रामीण दूसरे प्रदेशों की ओर पलायन कर रहे हैं।

मेघनगर रेलवे स्टेशन पर इन दिनों यात्रियों की भारी भीड़ दिखाई दे रही है। बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार अपने सामान के साथ गुजरात और राजस्थान की ओर रवाना हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि ग्रामीण मुख्य रूप से सोयाबीन की कटाई के काम के लिए इन प्रदेशों का रुख कर रहे हैं। कटाई का काम पूरा होने के बाद करीब 15 से 20 दिनों में इनके वापस लौटने की बात सामने आ रही है।

त्योहारों के बीच घर से दूर जाने की मजबूरी

एक ओर जहां शहरों और कस्बों में त्योहारों को लेकर उत्साह नजर आ रहा है, वहीं दूसरी ओर आदिवासी अंचल के कई घरों में रोजगार की चिंता बनी हुई है। परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने और कुछ अतिरिक्त आमदनी के लिए ग्रामीणों को त्योहारों के समय भी अपने परिवार से दूर जाना पड़ रहा है।

झाबुआ जिले में पलायन बना गंभीर मुद्दा

झाबुआ जिला आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है, जहां बड़ी संख्या में लोग खेती और मजदूरी पर निर्भर हैं। स्थानीय स्तर पर पर्याप्त और नियमित रोजगार के अवसर नहीं मिलने के कारण हर साल बड़ी संख्या में ग्रामीण रोजगार की तलाश में गुजरात, राजस्थान और अन्य राज्यों की ओर पलायन करते हैं।

 सरकार की कई योजनाओं का लाभ जरूरतमंद लोगों तक सही रूप से धरातल पर नहीं पहुंच पाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं होने के कारण पलायन की स्थिति बनी हुई है। यदि ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हो और स्थायी रोजगार के अवसर उपलब्ध हों, तो लोगों को अपने परिवार से दूर दूसरे प्रदेशों में जाने की मजबूरी कम हो सकती है।

रेलवे स्टेशन पर दिख रही पलायन की तस्वीर

मेघनगर रेलवे स्टेशन पर उमड़ रही भीड़ आदिवासी अंचल में रोजगार की स्थिति की एक तस्वीर पेश कर रही है। सिर पर सामान, हाथों में बैग और आंखों में घर लौटने की उम्मीद लिए ग्रामीण दूसरे प्रदेशों की ओर निकल रहे हैं। इनका ना है कि काम पूरा होने के बाद करीब 15 से 20 दिन में वापस अपने घर लौटेंगे।

त्योहारों के बीच रेलवे स्टेशन पर दिखाई दे रही यह भीड़ सिर्फ यात्रियों की भीड़ नहीं, बल्कि रोजगार की तलाश, परिवार की जिम्मेदारियों और बेहतर भविष्य की उम्मीद में घर से दूर जाने की मजबूरी की कहानी भी बयां कर रही है।

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