श्रद्धा और उल्लास के साथ मना राधा अष्टमी महापर्व

0

पेटलावद। राधा-कृष्ण का प्रेम कोई लौकिक या सांसारिक आकर्षण नहीं है, बल्कि यह जीवात्मा और परमात्मा के अनन्य मिलन का उच्चतम स्वरूप है। इस दिव्य प्रेम में कामवासना का रत्ती भर भी स्थान नहीं है; यह तो केवल निश्छल भक्ति मार्ग पर चलने वाले परम साधकों को प्राप्त होने वाला ईश्वरीय उपहार है। उन्होंने कहा कि राधा और कृष्ण दो अस्तित्व नहीं बल्कि एक ही रूप हैं, जो संसार के बंधनों को छोड़कर भगवान को प्राप्त करने का मार्ग दिखाते हैं।दामोदर उत्सव समिति और श्री जी पथ सेवा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को दामोदर कॉलोनी में राधा अष्टमी के पावन पर्व पर कथा प्रवक्ता  वैष्णवी भट्ट ने कही।


दामोदर कालोनी के गणेश पंडाल में आयोजित इस भव्य प्राकट्य उत्सव में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर दिव्य आध्यात्मिक लाभ अर्जित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश की भव्य आरती के साथ हुआ, जिसके पश्चात आयोजन समिति द्वारा मुख्य वक्ता परम विदुषी वैष्णवी भट्ट का भावभीना स्वागत व अभिनंदन किया गया।
महापर्व के मुख्य आकर्षण के रूप में प्रख्यात कथा प्रवक्ता सुश्री वैष्णवी भट्ट ने अपने ज्ञानवर्धक और दिव्य प्रवचनों से पंडाल में उपस्थित जनसमुदाय को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। उन्होंने श्री राधा जी के प्राकट्य के अलौकिक वृतांत का सविस्तार वर्णन करते हुए भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी के पावन संबंध की गूढ़ आध्यात्मिक व्याख्या की।
राधा अष्टमी के इस पावन प्रसंग के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को बरसाना में कीर्ति कुमारी के यहाँ साक्षात् ह्लादिनी शक्ति राधा जी का प्राकट्य हुआ था। सनातन परंपरा में यह दिन पूर्ण समर्पण, भक्ति और प्रेम के प्राकट्य का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि बिना राधा रानी की कृपा और आराधना के भगवान कृष्ण की भक्ति अधूरी रहती है, इसलिए भक्त इस दिन व्रत रखकर उनके दिव्य स्वरूप की वंदना करते हैं।
कथा प्रसंगों के बीच-बीच में सुश्री वैष्णवी भट्ट द्वारा गाए गए सुमधुर भजनों और कीर्तनों ने संपूर्ण वातावरण को गोकुलधाम जैसा बना दिया। उनके भजनों पर झूमते हुए भक्तगण भाव-विभोर हो उठे। राधा जी के प्राकट्य के दिव्य क्षण पर पंडाल में भव्य पुष्प वर्षा की गई और शानदार आतिशबाजी के साथ श्रद्धालुओं ने नाच-गान कर महा उत्सव मनाया।
कार्यक्रम की पूर्णाहुति पर सभी भक्तों ने सामूहिक रूप से श्री राधा जी की आरती उतारी और एक-दूसरे को राधा अष्टमी की बधाइयां दीं। इस पावन अवसर पर दामोदर उत्सव समिति के सदस्यों द्वारा मुख्य वक्ता सुश्री वैष्णवी भट्ट का विशेष सम्मान व बहुमान किया गया। अंत में श्रद्धालुओं को महाप्रसाद का वितरण किया गया, जिसके साथ ही इस अनूठे आध्यात्मिक आयोजन का भव्य समापन हुआ।

Leave A Reply

Your email address will not be published.