अजय मोदी, सोंडवा
यूपीआई (UPI) ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) या अन्य किसी प्रकार का टैक्स लागू किए जाने की संभावनाओं ने व्यापारी वर्ग की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस संभावित कदम का कड़ा विरोध करते हुए सोंडवा व्यापारी संघ ने समूचे जिले और देश के कारोबारियों का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन स्थानीय तहसीलदार हीरालाल एस्के को प्रस्तुत किया है। व्यापारियों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि डिजिटल इंडिया अभियान को सफल बनाने वाले कारोबारी वर्ग पर अब यह नया वित्तीय बोझ डालना किसी भी लिहाज से उचित नहीं है।
सौंपे गए ज्ञापन में इस बात पर गहरी आपत्ति दर्ज कराई गई है कि 2000 रुपये से अधिक के आम व्यापारिक यूपीआई भुगतानों पर एमडीआर या कोई नया शुल्क थोपने का विचार कारोबारी जगत के लिए एक बड़ा झटका है। संघ का तर्क है कि व्यापारिक लाभ का दायरा पहले ही सीमित है। यदि यह अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है, तो व्यापारियों की परिचालन लागत बढ़ जाएगी। इसका सीधा असर उनके मुनाफे पर पड़ेगा और अंततः इससे बाजार में महंगाई भी बढ़ सकती है। कारोबारियों ने याद दिलाया कि केंद्र सरकार की मंशा के अनुरूप ही उन्होंने नकदी की पुरानी व्यवस्था को छोड़कर डिजिटल लेन-देन को अपनाया था, जिससे इस प्रणाली ने देश में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है।
व्यापारी संघ द्वारा रखी गई प्रमुख मांगें:
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लेन-देन रहे पूर्णतः निशुल्क: यूपीआई के जरिए होने वाले भुगतानों पर किसी भी तरह का एमडीआर या अतिरिक्त कर न वसूला जाए।
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बनी रहे डिजिटल भुगतान की सुगमता: छोटे और बड़े सभी प्रकार के व्यापारियों के हितों की रक्षा करते हुए, डिजिटल पेमेंट की इस प्रणाली को पहले की तरह ही सस्ता, सहज और सरल रखा जाए।
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व्यापारियों पर न पड़े अतिरिक्त बोझ: देश की आर्थिक तरक्की में डिजिटल भुगतान के बड़े योगदान को देखते हुए, ऐसी कोई नीति न लाई जाए जिससे व्यापारी वर्ग हतोत्साहित हो।
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नीति लागू करने से पूर्व हो व्यापक चर्चा: किसी भी नए शुल्क व्यवस्था को अमल में लाने से पहले पूरे देश के प्रमुख व्यापारी संगठनों और प्रतिनिधियों से खुलकर रायशुमारी की जानी चाहिए।
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प्रस्ताव वापस लेने की अपील: अगर सरकार ने यूपीआई पर कोई भी नया चार्ज लगाने का प्रस्ताव तैयार किया है, तो उस पर अविलंब पुनर्विचार करते हुए व्यापारियों को इससे मुक्त रखा जाए।