बाग रोड से उत्कृष्ट विद्यालय तक गूंजे आदिवासी एकता के नारे, निलेश डावर ने कहा—प्रतिनिधियों से सवाल पूछें और एकजुट होकर अधिकारों की लड़ाई लड़ें

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जितेंद्र वर्मा, जोबट

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को जोबट नगर में आदिवासी समाज की ओर से भव्य रैली एवं जनसभा का आयोजन किया गया। बाग रोड से शुरू हुई रैली नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय परिसर पहुंची, जहां विशाल जनसभा आयोजित की गई। रैली में बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा, बुजुर्ग, कर्मचारी एवं समाजजन शामिल हुए। पारंपरिक वेशभूषा, ढोल-मांदल की थाप और आदिवासी संस्कृति से जुड़े नारों ने पूरे नगर का माहौल उत्साहपूर्ण बना दिया।

जनसभा में वक्ताओं ने आदिवासी समाज की एकता, शिक्षा, सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक जागरूकता और अधिकारों के संरक्षण पर जोर दिया। कार्यक्रम में समाज के गौरवशाली इतिहास और जल-जंगल-जमीन से जुड़े पूर्वजों के योगदान को भी याद किया गया।

निलेश डावर ने जनप्रतिनिधियों से जवाबदेही तय करने की अपील की

सभा को संबोधित करते हुए निलेश डावर ने आदिवासी समाज से अपने अधिकारों को लेकर जागरूक रहने और जनप्रतिनिधियों से सवाल पूछने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज जिन प्रतिनिधियों को चुनकर आगे भेजता है, उनसे क्षेत्र और समाज के विकास को लेकर जवाबदेही तय करने की जरूरत है।

डावर ने कहा कि समाज को अब अपने अधिकारों और क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दों पर खुलकर सवाल करना चाहिए। उन्होंने आदिवासी समाज से आपसी एकता बनाए रखने तथा किसी भी प्रकार के विभाजन से बचने की अपील की।

उन्होंने आरक्षण के माध्यम से उच्च पदों पर पहुंचे अधिकारी-कर्मचारियों से भी समाज के शिक्षित एवं बेरोजगार युवाओं को आगे बढ़ाने में सहयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को स्वरोजगार और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए सक्षम लोगों को आगे आकर सहयोग करना चाहिए।

इतिहास और संस्कृति पर वक्ताओं ने रखे विचार

कार्यक्रम में भूरसिंह रावत ने आदिवासी समाज के इतिहास, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत पर प्रकाश डाला। उन्होंने जल, जंगल और जमीन के संरक्षण में आदिवासी समाज के पूर्वजों के योगदान का उल्लेख करते हुए नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहने का संदेश दिया।

सरपंच प्रतिनिधि मोतीसिंह भूरिया, कैलाश सोलंकी एवं बलेड़ी सरपंच रमेश डावर ने समाज के शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक विकास को लेकर अपने विचार रखे। वहीं भीकू चौहान, वीरेंद्र बघेल, रिंकुबाला डावर और पाताल चौहान ने भी समाज की एकता, शिक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण पर अपने विचार व्यक्त किए।

स्वागत से लेकर आभार तक संभाली जिम्मेदारी

कार्यक्रम की शुरुआत केरम चौहान के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचे समाजजनों का स्वागत किया। मंच का संचालन शंकर गुथरिया ने किया। कार्यक्रम के समापन पर भयड़िया सर ने उपस्थित समाजजनों, अतिथियों, महिलाओं और युवाओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजजनों की सहभागिता रही। आयोजन के माध्यम से आदिवासी समाज की एकता, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया।

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