क्या शहीद को भूल गया सिस्टम? 23वें शहादत दिवस पर सूना रहा स्मारक, न प्रशासन पहुंचा… न जनप्रतिनिधि

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शान ठाकुर, पेटलावद 

गुरुवार, 23 जुलाई का दिन झाबुआ जिले के लिए गौरव और गर्व का प्रतीक माना जाता है। एक ओर पूरा देश अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की जयंती मना रहा था, वहीं इसी दिन जिले के तारखेड़ी गांव के वीर सपूत शहीद भगवानलाल मिंडकिया के शहादत दिवस की 22वीं पुण्यतिथि भी थी। लेकिन अफसोस की बात यह रही कि जिस शहीद ने महज 23 वर्ष की उम्र में देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए, उसके बलिदान को इस बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने मानो भुला दिया। हर वर्ष शहीद भगवानलाल मिंडकिया की प्रतिमा पर प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, विभिन्न संगठनों और ग्रामीणों द्वारा माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की जाती रही है। लेकिन इस बार न कोई सरकारी कार्यक्रम आयोजित हुआ, न कोई प्रशासनिक अधिकारी पहुंचा और न ही कोई जनप्रतिनिधि शहीद को नमन करने आया। इससे ग्रामीणों और परिजनों में मायूसी साफ दिखाई दी।

शहीद भगवानलाल मिंडकिया का जन्म 19 मई 1981 को झाबुआ जिले के तारखेड़ी गांव में हुआ था। बचपन से ही उनमें देशसेवा का जज्बा था। इसी संकल्प को साकार करते हुए 12 जून 2001 को वे त्रिपुरा स्टेट राइफल्स की सातवीं बटालियन में राइफलमैन के रूप में भर्ती हुए और मातृभूमि की रक्षा का दायित्व संभाला।

23 जुलाई 2004 की रात वे सीमा क्षेत्र में पूरी मुस्तैदी से गश्त कर रहे थे। इसी दौरान आतंकवादियों ने अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। भगवानलाल ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए आतंकियों का डटकर मुकाबला किया। लेकिन संघर्ष के दौरान आतंकियों की एक गोली उनकी आंख के पास लगी और वे मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए। उस समय उनकी उम्र मात्र 23 वर्ष थी।

शहीद दिवस पर गांव के लोगों, परिजनों और कुछ सामाजिक संगठनों ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी तथा उनके बलिदान को याद किया।

सामाजिक कार्यकर्ता चरणसिंह लववंशी ने कहा कि “फौजी हमारे देश की आन, बान और शान हैं। आज देश सुरक्षित है तो उसके पीछे हमारे जवानों का सर्वोच्च बलिदान है। शहीद भगवानलाल मिंडकिया जैसे वीर सपूत पूरे आदिवासी अंचल का गौरव हैं। उनका सम्मान केवल एक दिन नहीं, बल्कि हर दिन होना चाहिए।”

ग्रामीणों का कहना है कि जिस वीर सपूत ने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर किए, उसके शहादत दिवस पर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति कई सवाल खड़े करती है। लोगों का मानना है कि शहीदों के सम्मान में सरकारी स्तर पर कार्यक्रम आयोजित होना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी उनके त्याग, साहस और राष्ट्रभक्ति से प्रेरणा ले सके।

तारखेड़ी के लोगों की मांग है कि भविष्य में शहीद भगवानलाल मिंडकिया के शहादत दिवस को जिले के स्तर पर सम्मानपूर्वक मनाया जाए और प्रशासन तथा जनप्रतिनिधि उनकी स्मृति को उचित सम्मान दें। आखिर देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर सपूतों का सम्मान ही सच्ची राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। हालांकि इस बार प्रशासन या जनप्रतिनिधियों का स्मारक तक नही पहुचाना आखिर क्या कारण रहे इसका खुलासा नही हो पाया है। खबर लिखे जाने तक मामले कोई अपडेट सामने नही आया है।

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