सेवानिवृत्ति पर अनूठी मिसाल: मंगल सिंह नायक ने अपने खर्च पर कराया 11 बच्चों का यज्ञोपवीत, 5 राज्यों के 52 नायकों का किया सम्मान

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​भूपेंद्र नायक, पिटोल
आमतौर पर शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त होने पर लोग गाजे-बाजे के साथ घर लौटते हैं और परिजनों व मित्रों के लिए सहभोज का आयोजन करते हैं। लेकिन रंभापुर झाड़कीटोड़ी के निवासी श्री मंगल सिंह नायक (झाड़) ने लबाना समाज के लिए ऐतिहासिक और सामाजिक हित की एक अनूठी मिसाल कायम की है।
​बीती 30 जून को श्री मंगल सिंह झाड़ अपनी 40 वर्षों की गौरवपूर्ण शासकीय सेवा के बाद ‘पीएम श्री शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, थांदला’ (जिला झाबुआ) से सेवानिवृत्त हुए। इस विदाई को यादगार और समाजोपयोगी बनाने के लिए उन्होंने एक ऐसी सकारात्मक पहल की, जिसने लबाना समाज में सामाजिक बदलाव की ओर एक मजबूत कदम बढ़ाया है। भारत के 19 राज्यों में निवास करने वाले लबाना समाज के गरीब तबके के उत्थान के लिए उन्होंने यह ऐतिहासिक कदम उठाया।


​11 बालकों का कराया सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार
मंगल सिंह झाड़ 30 जून को सेवानिवृत्त हुए और ठीक अगले दिन, 1 जुलाई को झाबुआ जिले के प्रमुख धार्मिक स्थल ‘पीपलखूंटा’ में एक भव्य मांगलिक व सामाजिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। लबाना समाज में जन्म से 15 वर्ष तक की आयु के बच्चों का यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार किया जाता है, जिसमें व्यक्तिगत स्तर पर लाखों रुपये का खर्च आता है। गरीब परिवारों के लिए यह खर्च उठाना मुश्किल होता है। ऐसे में मंगल सिंह नायक ने इस जिम्मेदारी को अपने कंधों पर लिया और स्वयं के खर्चे पर समाज के 11 बच्चों का यज्ञोपवीत संस्कार करवाकर समाज को उत्थान का संदेश दिया।


​परंपरा को जीवंत रख 5 राज्यों के 52 नायकों का किया सम्मान
​लबाना समाज में अनादि काल से ‘नायक प्रथा’ चली आ रही है, जिसमें जमींदार और जाजम व्यवस्था आज भी कायम है। समाज का हर वर्ग इस प्रथा का सम्मान करता है और आज भी जटिल सामाजिक विवादों के फैसले जाजम पर ही सुलझाए जाते हैं। इसी परंपरा को अक्षुण्ण रखने के लिए श्री मंगल सिंह नायक द्वारा मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और तेलंगाना राज्य से पधारे 52 नायक साहबों का पगड़ी बांधकर, शाल व श्रीफल भेंट कर एक मंच पर सम्मान किया गया। इसके जरिए उन्होंने आने वाली पीढ़ी को संदेश दिया कि समाज की यह गौरवशाली विरासत हमेशा कायम रहनी चाहिए।


​वक्ताओं ने दिया सामाजिक सुधार और इतिहास का संदेश
​कार्यक्रम में लबाना समाज के इतिहास और सामाजिक सुधार पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे: ​महंत 1008 श्री दयाराम दास जी महाराज (पीठाधीश्वर, पीपलखूंटा धाम): उन्होंने समाज को धार्मिक और आध्यात्मिक प्रवृत्ति से जुड़ने, दान-पुण्य करने और भगवान की भक्ति के साथ आदर्श सामाजिक जीवन जीने का आशीर्वाद दिया।
​के. के. त्रिवेदी (इतिहासकार): उन्होंने सन 1600 ईस्वी से लबाना समाज के समृद्ध इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि झाबुआ जिले के कई शहरों और गाँवों के नाम लबाना समाज के नायकों के नाम पर हैं। उन्होंने ‘झब्बू नायक’ के इतिहास को भी विस्तार से समझाया।
​रामसिंह मेरावत व राजू भाई चोरिया (गुजरात): द्वारा शिक्षा में पालक द्वारा अपनी रुचि विषय चयन कर पढ़ाई करना चाहिए रामसिंह मेरावत द्वारा युवाओं में बढ़ते नशे के दुष्परिणामों पर चिंता जताते हुए उन्होंने बालिकाओं को संस्कार देने और बच्चों को उनकी रुचि के अनुसार उच्च शिक्षा दिलाने पर जोर दिया।
​बाबूलाल नायक (पेंटर): इन्होंने आध्यात्मिक योग और गणेश लबाना मोर राजस्थान द्वारा युवा पीढ़ी को वरिष्ठों के मार्गदर्शन में काम करने के लिए प्रेरित किया।
​थान सिंह नायक (तेलंगाना): उन्होंने सामाजिक समरसता पर जोर देते हुए आने वाली पीढ़ी को अपनी विरासत को संजोकर रखने का आह्वान किया।
​उषा हाड़ा (मातृशक्ति प्रतिनिधि): उन्होंने समाज में गोवंश पालन, गोवध के विरोध और बेटियों को माता-पिता की आज्ञा व सामाजिक रीति-रिवाजों का पालन करने की सीख दी।


​मेधावी छात्र-छात्राओं का सम्मान
​शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से श्री मंगल सिंह नायक द्वारा राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात के उन छात्र-छात्राओं को शील्ड और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया, जिन्होंने कक्षा 10वीं और 12वीं में 85% से अधिक अंक प्राप्त किए हैं। 85बालक बालिकाओं का किया सम्मान
​पाँच राज्यों के सामाजिक प्रतिनिधि हुए शामिल
​देर रात तक चले इस गरिमामयी कार्यक्रम में पाँच राज्यों के प्रतिष्ठित डॉक्टर, वकील, इंजीनियर, किसान, व्यापारी, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए, जिससे यह आयोजन सामाजिक समरसता की एक अनूठी मिसाल बन गया। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी अतिथियों व समाजजनों के लिए सहभोज का आयोजन किया गया।
​इस सफल कार्यक्रम का कुशल संचालन सामाजिक कार्यकर्ता कमलेश दातला, प्रवीण घोती और प्रहलाद घोती द्वारा किया गया, जबकि आभार प्रदर्शन बाबूलाल झाड़ द्वारा व्यक्त किया गया।

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