दिनेश वर्मा, झाबुआ
‘आपके ज्ञान, ऊर्जा और संकल्प से विकसित भारत का सपना साकार होगा। मैं आपसे आग्रह करती हूं कि शिक्षा और प्रतिभा का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए नहीं, बल्कि समाज के व्यापक कल्याण के लिए होना चाहिए। आप अपने आसपास के वंचित और ग्रामीणों की समस्याओं को समझें , उनकी समस्याओं का समाधान करें, उन्हें सशक्त बनाएं और विकास की मुख्य धारा से जोड़ने में अपनी भूमिका निभाएं। आप यहां से निकलकर बड़े अधिकारी बनेंगे, आपको कर्तव्यों के साथ बड़ी जिम्मेदारी निभानी है।’ यह बात देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कही। राष्ट्रपति मुर्मु 21 जून को जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहीं थीं। कार्यक्रम में राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में 141 मेधावी विद्यार्थियों को 240 स्वर्ण पदक मिले। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने चयनित विद्यार्थियों को 20 स्वर्ण पदक प्रदान किए। साथ ही, समारोह में 182 शोधार्थियों को पीएचडी उपाधि प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त 3 विद्वानों को डी-लिट, एक को डीएससी और पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर को मानद उपाधि प्रदान की गई। इस असवर पर विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों को स्नातक और स्नातकोत्तर उपाधियां भी प्रदान की गईं।
कार्यक्रम में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि आज रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के अवसर पर आप सभी के बीच आकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। रानी दुर्गावती, जिनके नाम पर यह विश्वविद्यालय स्थापित है, वे अदम्य साहस, शौर्य और पराक्रम की प्रतिमूर्ति थीं। पिछले वर्ष गोंडवाना साम्राज्य की उस महान वीरांगना की 501वीं जन्म जयंती देशवासियों ने मनाई है। संयोग से आज से कुछ दिन बाद उनका 462वां बलिदान दिवस है। रानी दुर्गावती भारत की नारी शक्ति के शौर्य का प्रतीक हैं। वे नारी शक्ति के लिए सदैव प्रेरणा की स्रोत रहेंगीं। मैं उन्हें सादर नमन करती हूं। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि प्रकृति के मनोरम क्षेत्र में स्थित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय की 36 वर्ष की यात्रा पर सभी को गर्व हो रहा होगा। इस विश्वविद्यालय के आसपास के क्षेत्र में जनजातीय वनवासिओं की संस्कृति की प्रचुर उपस्थिति है। इस विश्वविद्यालय से जुड़े रानी दुर्गावती के नाम की सार्थकता तभी सिद्ध होगी, जब जनजातीय समाज, वंचित तथा पिछड़े वर्ग की बेटियों की सशक्तिकरण के लिए प्रयास होगा।


