गोपाल गौशाला में पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा पर भव्य महोत्सव, गौसेवा एवं सहभोज का आयोजन

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जितेंद्र वाणी, नानपुर

पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर अलीराजपुर जिले की सबसे बड़ी गौशाला गोपाल गौशाला, नानपुर में पूर्णिमा महोत्सव बड़े श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाया गया। गौशाला के संचालक पंडित कमल किशोर नागर के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में हरि सत्संग समिति, खट्टाली द्वारा लगातार 74वें माह की पूर्णिमा सेवा का आयोजन किया गया।

हरि सत्संग समिति द्वारा प्रत्येक पूर्णिमा पर गौमाताओं के लिए गो-मिष्ठान एवं सहभोज का आयोजन किया जाता है। इसी कड़ी में आयोजित पूर्णिमा महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, गौभक्तों एवं समाजजनों ने भाग लेकर गौसेवा का पुण्य लाभ प्राप्त किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथियों में रघुनंदन शर्मा (जोबट) की सुपुत्री डॉ. शिखा शर्मा, विजय पारीक (जयपुर मित्र मंडल) एवं गोपाल नवाल (अलीराजपुर मित्र मंडल) शामिल रहे। अतिथियों ने गौमाता का विधिवत पूजन-अर्चन कर उन्हें गो-मिष्ठान खिलाया तथा जीवनभर गौसेवा करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर सभी अतिथियों का दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मान एवं स्वागत किया गया।

कार्यक्रम के दौरान प्रसिद्ध भजन गायक राजू भाई राठौड़ ने अपनी मधुर एवं भक्तिमय प्रस्तुतियों से वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। भजनों पर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भक्ति में लीन दिखाई दिए।

पूर्णिमा महोत्सव की प्रसादी के लाभार्थी स्वर्गीय रतनलाल जी एवं प्रकाशचंद जी तोषनीवाल (रतलाम), हाल मुकाम नानपुर परिवार रहे। उनके द्वारा गौमाताओं के लिए 51 किलोग्राम गो-मिष्ठान तथा 51 किलोग्राम आमरस अर्पित किया गया। गौशाला में उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भी प्रसादी ग्रहण की।

इस अवसर पर गौशाला परिवार की ओर से समाजजनों से अपील की गई कि वे अपने शुभ अवसरों जैसे जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ, विवाह समारोह, पुण्यतिथि एवं अन्य मांगलिक अवसरों पर गौमाता की सेवा कर पुण्य लाभ अर्जित करें।

कार्यक्रम का संचालन दिलीप परवाल ने किया। आयोजन में हरि सत्संग समिति के सभी सदस्य, नानपुर महिला मंडल, गोपाल गौशाला समिति के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में गौभक्त उपस्थित रहे। अंत में जितेंद्र राज ने सभी अतिथियों, सहयोगियों एवं उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया।

पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा पर आयोजित यह कार्यक्रम गौसेवा, धार्मिक आस्था एवं सामाजिक समरसता का सुंदर उदाहरण बना, जिसमें गौमाता की सेवा के साथ-साथ समाज को धर्म एवं सेवा का संदेश भी दिया गया।

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