मां लक्ष्मी की प्राण प्रतिष्ठा से भक्तिमय हुआ झायड़ा, कलश यात्रा में उमड़ा आस्था का सैलाब

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झाबुआ। जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर ग्रामीण अंचल झायड़ा में 29 मार्च से 31 मार्च 2026 तक त्रि-दिवसीय महालक्ष्मी मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव अत्यंत श्रद्धा और विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। लबाना समाज द्वारा आयोजित इस भव्य धर्मोत्सव में न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं, बल्कि पांच राज्यों से आए समाजजनों और सनातनी हिंदू सर्व समाज ने सहभागिता कर धर्म लाभ लिया।

भव्य कलश यात्रा और नगर भ्रमण

आयोजन के दौरान मातृशक्ति द्वारा भव्य कलश यात्रा निकाली गई। एक समान वेशभूषा में कलश धारण किए महिलाएं आगे चल रही थीं, वहीं उनके पीछे सुसज्जित बग्गी में मां लक्ष्मी की प्रतिमा विराजमान थी। मां भवानी मंदिर परिसर से शुरू हुई यह यात्रा गांव के प्रमुख मार्गों से गुजरी, जहाँ ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा कर माता का स्वागत किया। इस दौरान बैंड-बाजे और ढोल की थाप पर श्रद्धालु झूमते नजर आए।

वैदिक मंत्रोच्चार और अनुष्ठान

प्राण प्रतिष्ठा के मुख्य आचार्य ने अनुष्ठान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मूर्ति में देवत्व स्थापित करने के लिए जलाधिवास, अन्नाधिवास और घृताधिवास जैसी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। मंत्रोच्चार के बीच हवन कुंड में दी गई आहुतियों से वातावरण शुद्ध और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। मुख्य यजमानों सहित लबाना समाज के वरिष्ठजनों ने तन-मन-धन से इस आयोजन को निर्विघ्न संपन्न कराया।

सांस्कृतिक और धार्मिक संध्या

इन तीन दिनों में भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। दिन में जहाँ वैदिक अनुष्ठान हुए, वहीं रातों में खाटू श्याम भजन संध्या, सुंदरकांड पाठ और गुजराती लोक कलाकारों द्वारा ‘डायरा’ (भजन) की प्रस्तुति दी गई। हरिनाम संकीर्तन की गूंज से पूरा क्षेत्र गुंजायमान रहा।

राजनीतिक और सामाजिक दिग्गजों की उपस्थिति

इस आयोजन में मध्य प्रदेश सहित राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र से बड़ी संख्या में लबाना समाज के लोग जुटे। पीपलखुटा धाम के संत शिरोमणि श्री 1008 दयाराम जी महाराज सहित विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी अंतिम दिन पूर्णाहुति में पहुंचकर मां लक्ष्मी का आशीर्वाद लिया।

विशाल भंडारा और सम्मान समारोह

तीन दिवसीय इस आयोजन में प्रतिदिन विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने महाप्रसादी ग्रहण की। कार्यक्रम के समापन पर आयोजन समिति ने बाहर से आए अतिथियों, संतों और सहयोगियों का सम्मान करते हुए आभार व्यक्त किया।

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