जितेंद्र वाणी, नानपुर
गुड़ी पड़वा से सनातन धर्म में नए वर्ष का आरंभ ओर ग्यारस से गणगौर माताजी की बाड़ी बोई जाती हे और अमावस पर माताजी की बाड़ी में माता खेलने का प्रारंभ होता हे तिज के दिन माताजी की बाड़ी में दर्शन पूजन के बाद माताजी को रथ में रखकर घर लाते है।
दो स्थानों पर माताजी की बाड़ी बोई जाती हे माली समाज की बाड़ी बुदिया बाबा माली के यहां ओर सार्वजनिक बाड़ी पंडित ओमप्रकाश नागर के यहां , एकम् ओर दूज से ही सभी समाज की महिलाएं सज धजकर ढोल से पाती लेकर नगर से निकलकर गणगौर के गीत गाकर झालरिया देती हे ओर गणगौर के गीत गाती हे यह क्रम अमावस से आरंभ हो जाता हे सभी महिलाएं एकत्रित होकर घर घर जाकर माताजी के मेंहदी के गीत भजन करती हे और तमोल की प्रसादी बाटी जाती हे l