बाड़ी पूजन पश्चात घर रथ में रखकर लाए माताजी के ज्वारे की टोकनिया

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जितेंद्र वाणी, नानपुर

गुड़ी पड़वा से सनातन धर्म में नए वर्ष का आरंभ ओर ग्यारस से गणगौर माताजी की बाड़ी बोई जाती हे और अमावस पर माताजी की बाड़ी में माता खेलने का प्रारंभ होता हे तिज के दिन माताजी की बाड़ी में दर्शन पूजन के बाद माताजी को रथ में रखकर घर लाते है।

दो स्थानों पर माताजी की बाड़ी बोई जाती हे माली समाज की बाड़ी बुदिया बाबा माली के यहां ओर सार्वजनिक बाड़ी पंडित ओमप्रकाश नागर के यहां , एकम् ओर दूज से ही सभी समाज की महिलाएं सज धजकर ढोल से पाती लेकर नगर से निकलकर गणगौर के गीत गाकर झालरिया देती हे ओर गणगौर के गीत गाती हे यह क्रम अमावस से आरंभ हो जाता हे सभी महिलाएं एकत्रित होकर घर घर जाकर माताजी के मेंहदी के गीत भजन करती हे और तमोल की प्रसादी बाटी जाती हे l

माली समाज के अध्यक्ष मनीष माली ने बताया कि बाड़ी से माताजी को धूम धाम से रथ में लेकर आते हे ओर घर पर पूजन के बाद खीर भात का भोग लगाकर परिवार से जोड़े से केल के पत्ते पर माताजी के सामने भोग लगा खीर भात ग्रहण करते हे बाड़ी के पुजारी ओमप्रकाश नागर ओर माली की बाड़ी के राजेश माली ने बताया कि माताजी दो दिन की पावनी के रूप में घर पर रहती हे और सेवा करते हे माताजी का विसर्जन रविवार को होगा यदि कोई यजमान माताजी को सेवा के रूप में पावनी ले जाए तो खेड़ा पर से माताजी यजमान के घर ले जाते हे अभी तक इसी रूप रेखा नहीं बनी हे घनश्याम माली ने कहा कि माताजी रविवार को ठंडी हो जाएगी l कालिका मंदिर परिसर पर भगवत कथा का सात दिवसीय आयोजन हो रहा हे सभी कथा का श्रवण करे l

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