भूपेंद्र चौहान, चंद्रशेखर आजाद नगर शुक्रवार को कुछ संगठनों द्वारा एक पिकअप वाहन को थाने लाकर करीब 3 घंटे तक बाहर खड़ा रखा गया। दावा किया गया कि वाहन का एक्सीडेंट हुआ है, जबकि न घटनास्थल पर कोई बाइक थी न एक्सीडेंट का कोई प्रमाण। पिकअप वाहन का उपयोग रोजाना भैंस परिवहन के लिए होता है और गुजरात से आता-जाता है। केवल शंका के आधार पर वाहन थाने लाया गया। दिनभर वाहन थाने में खड़ा रहा। शाम तक आपसी समझौता हो गया। थाना प्रभारी के आदेश पर दीवानजी दिनेश हाड़ा द्वारा गाड़ी रात में 7:00 बजे गाड़ी के पेपर देखकर पिकप गाड़ी को छोड़ दिया गया। पुलिस ने बिना एफआईआर, बिना बाइक के कागजात जांच, बिना कार्रवाई वाहन छोड़ दिया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि कार्रवाई नहीं करना थी तो वाहन रोका ही क्यों गया। पुलिस थाने के टीआई से पूछने पर जवाब मिला कि जब सामने वाला पक्ष रिपोर्ट नहीं लिखवा रहा है तो क्या करें। सवाल यह भी है कि जब एक्सीडेंट नहीं हुआ, तो वाहन 3 घंटे थाने में क्यों रोका गया? क्या किसी संगठन को कानून अपने हाथ में लेकर वाहन पकड़ने का अधिकार है? बिना जांच वाहन छोड़ना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग नहीं है? मामले में थाना प्रभारी शिवराम तरौले से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी ने भी रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई है। इसलिए वाहन को छोड़ दिया गया है। Post navigation सेजावाड़ा के परेश गणावा ने रचा इतिहास, राज्य स्तरीय ओलंपियाड में फहराया परचम आज़ाद क्रिकेट क्लब देवली द्वारा आयोजित ओपन टेनिस क्रिकेट टूर्नामेंट का शुभारंभ