भूपेंद्र नायक, पिटोल

रविवार 25 अक्टूबर शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर ग्राम झायड़ा स्थित प्रसिद्ध माँ भवानी एवं महालक्ष्मी मंदिर में आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी लबाना समाज द्वारा आयोजित दो विशाल पदयात्राएं यहाँ पहुंचीं।

पहली पदयात्रा

भवानी कंस्ट्रक्शन, दाहोद के सौजन्य से पहली पदयात्रा सुबह 8 बजे माता जी की आरती के बाद गुजरात के ग्राम खेड़ा (दाहोद से 8 किमी दूर) से ध्वजा लेकर शुरू हुई। इसमें ग्राम तरवाड़िया, अनास, टांडा और चंदवाना के भक्तजन शामिल हुए। दोनों यात्राओं में 1500 से अधिक माताओं, बहनों और बच्चों ने कुलदेवी माँ भवानी के लिए यह यात्रा निकाली। यह यात्रा तरवाड़िया और खेड़ा से बैतूल-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग होते हुए कठला और खंगेला के रास्ते मध्य प्रदेश में प्रवेश कर झायड़ा की ओर बढ़ी। यात्रा के दौरान कठला में समाजजनों द्वारा स्वल्पाहार कराया गया। इसके बाद पिटोल में इसका भव्य स्वागत हुआ, जहां रघुनंदन गेस्ट हाउस में सभी यात्रियों के लिए चाय और फलाहार की व्यवस्था की गई। आगे फूलमाल में भी झाबुआ के लबाना समाज द्वारा यात्रियों के स्वागत के साथ स्वल्पाहार की व्यवस्था की गई। देर शाम यह पदयात्रा झायड़ा पहुंची।

दूसरी पदयात्रा

दूसरी पदयात्रा गुजरात के अनास हिमाला से शुरू होकर रंभापुर होते हुए झायड़ा पहुंची। रंभापुर में लबाना समाज द्वारा इस यात्रा का भव्य स्वागत कर स्वल्पाहार की व्यवस्था की गई जब दोनों पदयात्राएं ग्राम झायड़ा पहुंचीं, तो स्थानीय लबाना समाज ने बैंड-बाजे, डीजे की धुन और आतिशबाजी के साथ उनका भव्य स्वागत किया। मुख्य मार्ग से होते हुए सभी भक्तगण मंदिर प्रांगण पहुंचे। यहां माता की आरती की गई और गरबा चौक में विधि-विधान से ध्वज पूजन कर ध्वजा स्थापित की गई। आरती के पश्चात मंदिर समिति द्वारा सभी भक्तों के लिए महाप्रसादी (भंडारे) की विशेष व्यवस्था की गई। माँ भवानी एवं महालक्ष्मी मंदिर समिति, ग्राम झायड़ा ने इस विशाल आयोजन को सफल बनाने वाले सभी भक्तों और सहयोगियों का हृदय से आभार व्यक्त किया।

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