आलीराजपुर। विश्व की सबसे बड़ी पथमेड़ा गौशाला के लोक प्रसिद्ध एवं प्रधान संरक्षक श्रद्धेय गौ ऋषि स्वामी श्री दत्त शरणानंद जी महाराज, 31 वर्षीय गौ पर्यावरण एवं अध्यात्म चेतना पदयात्रा के प्रणेता गो धाम महा तीर्थ पथमेड़ा के राष्ट्रीय संयोजक परम पूज्य गुरुदेव भगवान ग्वाल संत श्री गोपालचार्य गोपालानंद सरस्वती जी महाराज, परम पूज्य साध्वी श्रद्धा गोपाल दीदी जी एवं क्रांतिकारी संत श्री गोपाल स्वामी गौ शरणानंद जी महाराज की गो रथ यात्रा के दौरान आलीराजपुर नगर की पावन एवं पुनीत धरा पर प्रवचन के दौरान एवं परमपूज्य गुरुदेव भगवान जी के आशीर्वाद से आलीराजपुर जिले की ग्वाल् शक्ति सेना एवं धेनु शक्ति सेना का गठन किया गया।

 इस सेना के गठन का उद्देश्य सिर्फ गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करना एवं पूरे भारतवर्ष की गौ माता की पीड़ा को दूर करना, गली-गली में जो गौ माता भोजन के लिए भटक रही है उन्हें किसी गौ भक्त के यहां या गौशाला में स्थान देना, गौ परिवहन रोकना, गौ संवर्धन, गौ संरक्षण, गौ आधारित कृषि, पंचगव्य चिकित्सा, गौ आधारित शिक्षा सहित देश के प्रत्येक जिले में गो चिकित्सालय निर्माण का पवित्र भाव का संकल्प है। आलीराजपुर जिला ग्वाल शक्ति सेना कार्यकारिणी संरक्षक पंचमुखी हनुमान मंदिर के बाबा घनश्याम दास जी महाराज, राजेंद्र टवली, मदन नगवाडीया, विरेंद्र गुप्ता, कृष्णकांत कोठारी, किशन राठौड़, बद्रीलाल जी राठौड़, संयोजक गणपत गुप्ता, सहसंयोजक गोविंद जोशी, प्रमुख सलाहकार सुरेश माहेश्वरी एडवोकेट, संगठन मंत्री बद्रीलाल गुप्ता, डॉ. के सी गुप्ता, अरुण गहलोत, राजेश जोशी, अशोक सोनी, जिला अध्यक्ष रामनारायण माली, उपाध्यक्ष महेंद्र टवली, महेश राठौर जोबट, सचिव बद्रीलाल राठौर, मीडिया प्रभारी आनंद शाह आजाद नगर एवं कृष्णकांत बेड़िया, आलीराजपुर जिला धेनु शक्ति सेना कार्यकारिणी संरक्षक साध्वी बिंदिया गोराना, पुष्पा नगवाडीया, राजकुमारी सोमानी, शालिनी उपाध्याय, चंदू प्रजापति, संयोजक अंजू सिसोदिया, सह संयोजक मीना ओझा, अध्यक्ष पूर्णिमा व्यास, उपाध्यक्ष मीना पवार, नीलम गहलोत, सचिव सुरभि जैन कोषाध्यक्ष अनीता राठौड़, विशेष सहयोगी हीरा माली, सुरभी राठौड़, मीडिया प्रभारी बबीता गुप्ता, आलीराजपुर नगर ग्वाल शक्ति सेना अध्यक्ष संजय पवार, जोबट नगर अध्यक्ष श्रीयक असोरिया, आलीराजपुर नगर धेनु शक्ति सेना अध्यक्ष सुनीता गोराना, जोबट नगर अध्यक्ष अनसुया असोरिया एवं श्री राम गौशाला के संरक्षक प्रिंस सोनी को बनाया गया।

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