मयंक विश्वकर्मा, आम्बुआ – इस वर्ष प्रशासन की सख्ती के कारण अनुमति नहीं मिलने से स्थानीय प्रशासन ने रावण के पुतले का निर्माण नहीं कराया दोपहर 3 बजे तक रावण दहन की कोई चर्चा नहीं थी मगर इस परंपरा का निर्वहन छोटे बच्चों तथा कुछ युवाओं ने आपस में चंदा (पैसा) एकत्र कर एक छोटा किंतु आकर्षक पुतले का निर्माण कर पुराने पत्थर कारखाना परिसर के मैदान में शाम 5 बजे रख दिया तथा शाम के 7 बजे बाद आतिशबाजी करते हुए पुतला दहन कर दिया बड़े पुतले का निर्माण नहीं होने से आसपास के ग्रामीण नहीं आए जिस कारण छोटे व्यापारियों फल एवं खिलौना वालों की बिक्री नहीं होने से हानि उठाना पड़ी, बच्चों ने परंपरा कायम रखी जिसकी सभी ने प्रशंसा की। Post navigation उपचुनाव के मद्देनजर पैरामिलिट्री फोर्स व पुलिस बल ने निकाला शहर में फ्लेगमार्च नवरात्रि के अवसर पर स्थापित घट व माता जी की मूर्तियों का विसर्जन