शान ठाकुर, पेटलावद लगभग तीन वर्षों से साइबर विभाग द्वारा लगाए गए साइबर लियन (Cyber Lien) के कारण बैंक खाते में फंसी ₹4,56,341 की राशि को लेकर संघर्ष कर रहे एक छोटे व्यापारी को बड़ी कानूनी राहत मिली है। व्यापारी ने राशि मुक्त कराने के लिए बैंक, संबंधित अधिकारियों एवं विभिन्न स्तरों पर कई प्रयास किए, लेकिन उसे सफलता नहीं मिल सकी। लंबे समय तक राशि अवरुद्ध रहने से उसके व्यापार और परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। आखिरकार व्यापारी ने अधिवक्ता वागेश सामवेदी से संपर्क किया। प्रकरण का विस्तृत अध्ययन करने के बाद अधिवक्ता सामवेदी ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत माननीय मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की। याचिका में यह पक्ष रखा गया कि किसी व्यक्ति की वैध रूप से अर्जित राशि को वर्षों तक अवरुद्ध रखना उसके जीवन एवं आजीविका के संवैधानिक अधिकारों को प्रभावित करता है। माननीय उच्च न्यायालय में हुई सुनवाई के बाद मामले में आवश्यक न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी और वरिष्ठ न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा साइबर लियन हटाने संबंधी आदेश पारित किया गया। न्यायालय के आदेश के बाद अब बैंक द्वारा आवश्यक औपचारिकताएँ पूर्ण कर राशि जारी किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। न्यायालय के आदेश के बाद व्यापारी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि लगभग तीन वर्षों तक निरंतर प्रयास करने के बावजूद उसे कोई राहत नहीं मिली थी, लेकिन अधिवक्ता वागेश सामवेदी की सक्रिय पहल, प्रभावी पैरवी और समय पर उठाए गए कानूनी कदमों के कारण आज उसे न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। उन्होंने दोनों माननीय न्यायालयों के प्रति भी आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि आदेश का शीघ्र पालन होगा और उनकी मेहनत की कमाई उन्हें वापस प्राप्त होगी। यह प्रकरण साइबर लियन से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है, जिससे यह संदेश जाता है कि उचित कानूनी उपाय और प्रभावी पैरवी के माध्यम से वर्षों से लंबित मामलों में भी न्याय का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है। Post navigation नशे से दूरी है जरूरी 2.0 अभियान के तहत जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित करवड़ में कपास से भरा आयशर ट्रक पलटा, चालक गंभीर घायल