लोहित झामर, मेघनगर
धोका और नाहटा परिवार के लगभग सभी सदस्यों द्वारा पूज्य अणुवत्स ठाना 4 के सानिध्य में आत्मोत्थान चतुर्मास के अंतर्गत तपस्या की जा रही है जिसके चलते प्रीती मिथुन धोका एवं कु.दर्शना नाहटा ने 31 उपवास की दीर्घ तपस्या पूर्ण कर बुधवार को पारणा किया।
धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए पूज्य संयत मुनिजी एवं शुभेष मुनिजी ने तप के महत्व को समझते हुए बताया की उग्र तपस्या से मोक्ष की प्राप्ति होती है तप त्याग से प्रीत जरूरी है परन्तु जहाँ ममत्व होता है वहां तपस्या नही होती। जीव राग द्वेष घटायेगा तो आत्मोत्थान संभव है। राग द्वेष के बारे में समझाते हुए बताया की जो हमारे अनुकूल चले उससे हमे राग हो जाता है और जो प्रतिकूल चले उससे द्वेष दुनिया स्वार्थ की है जो देवता को भी स्वार्थ के लिये मानते है।
