लाॅकडाउन में भी बैकों में भीड के लिये कौन है असली जिम्मेदार ?

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आकाश उपाध्याय/सुनिल खेडे@जोबट

            लाॅकडाउन होने के बावजुद आज जोबट की दो मुख्य बैंको में बीना सोशल डिस्टेंस के खासी भीड देखी गई । उक्त भीड को लेकर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं सोशल मिडिया पर आ रही है वही संबंधीत बैंक व प्रशासन पर लापरवारी का आरोप लग रहे है । लेकिन गहराई से देखा जाये तो इन बैंको भीड न होते हुए अपने ही पंचायतों की कियोस्क बैकं में होना चाहिये ।

अब बात असल मुद्दे की –

               केन्द्र की डिजीटल इण्डिया के तहत हर ग्राम व शहरो के छोटे बडे मजदुर-हितग्राहीयों के निशुल्क खाते खाले गये व हर प्रकार की योजना का पैसा सीधे हितग्राही के खाते में डाला जा रहा है । बैंको में बढते खातो व ग्रामीणो की सुविधा की दृष्टि से केन्द्र, राज्य सरकारो व राष्ट्रीयकृत बैंको ने ग्रामीण क्षेत्रो के हितग्राहीयों को उनके ही गांव में बैंकिग सुविधाएं मिले इस उद्देश्य से कियोस्क बैंक खोलने की योजना बनाई थी । मजदुरी का राशि, हर प्रकार की पेंशन राशि, योजनाओं की राशि निकालने के लिये ग्रामीणों को कई किलोमीटर पैदल चलकर शहरो में न आना पडे इस हेतु किस्योक बैंक खाले जा रहे थे । लेकिन जमीनी हकिकत कुछ और ही है । बात अगर केवल आलीराजपुर जिले की जाये तो यह 90 प्रतिशत कियोस्क बैंक शहरो में स्थापीत है वही कियोस्क बैंक के माध्यम से ग्रामीणों के समय व धन की बचत की जो मंशा थी जो पुरी होती नजर नही आ रही है ।

                 अगर समय रहते पुर्णतः नियमानुसार जो जहा की पंचायत के लिये अधिकृत हे वही कियोस्क बैंके खोली जाती तो निश्चित ही इस लाॅकडाउन में भी ग्रामीणो की भीड बैंको के बाहर नही देखने को मिलती । हमने कई बार देखा है की 300 से 400 रूपये लेने के लिये ग्रामीणों को कई किलोमीटर शहर आना पडता है जिसमें आने जाने में ही 50 से 100 रू खर्च हो जाते है । आज बैंको में भीड को देखा जाये तो कही न कही इन ग्रामीणों की मजबुरी दिखाई देती है जो इस महामारी में भी संक्रमण का खतरा उठाकर बैंको की लाईनो में लगे है । खबरो व जानकारी के बाद प्रशासन अपनी निंद से जागता है और इन बैंको से बलपुर्वक इन्हे हटाती नजर आती है लेकिन कभी कियोस्क बैंको को अधिकृत पंचायतो मेे खालने के सख्त निर्देश देती नजर नही आती । समय रहते अगर नियमानुसार कियोस्क बैंके खोली जाती तो इस लाॅकडाउन में पहले से ही टुट चुके ग्रामीणों पैदल व बीना संसाधन के कई किलोमीटर चलकर इस तरह बैंक में नही आना पडता ।

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