हर कोई हुआ हैरान; आखिर “सौरभ” ने क्यो किया सुसाइड..

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सलमान शैख़@ झाबुआ Live
जिंदगी रोशनी है, तो मौत अंधेरा, बड़ा ही मुश्किल फैसला होता होगा, स्वयं अपने हाथों अपना वजूद मिटाने यानि आत्महत्या करने का। टूट रही नयी पीढ़ी को सहारा देने वाली डोर देश की नयी पीढ़ी में तनाव और अवसाद किस कदर बढ़ रहा है, इसके स्पष्ट संकेत सोमवार को इंदौर में पेटलावद के किशोर युवा द्वारा किए गए सुसाइड से मिल रहे है। भारत में किसानो की आत्महत्या पर खूब चर्चा होती है, होनी भी चाहिए, लेकिन युवाओ की आत्महत्या पर कुछ नही होता, जबकि युवाओ की बड़ी संख्या इसका शिकार हो रही है। हमारा समाज इतना कमर्शियल और उपभोक्तावादी हो चुका है कि हर चीज के लिए मारा-मारी मची हुई है।
*जैसे ही ट्रैन आई लगा दी छलांग-*
इदौर में रहकर पढ़ाई कर रहे पेटलावद के होनहार किशोर युवक सौरभ पिता उज्जवल जानी ने सोमवार को करीब 6 बजे जूनी इंदौर थानाक्षैत्र में भोलाराम उस्ताद मार्ग पर रेलवे ब्रीज पर महू-इंदौर डेमू ट्रेन के सामने कूदकर खुदखुशी कर ली। जैसे ही यह खबर पेटलावद पहंची तो एकाएक किसी को विश्वास ही नही हुआ। इस खबर को सुनकर सभी हैरान रह गए कि आखिर इतने हंसमुख और मिलनसार सौरभ ने आत्महत्या क्यो कर ली। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सौरभ ट्रैन आने का इंतजार कर रहा था। उसके आते ही उसने छलांग लगा दी। इसके बाद पुलिस द्वारा उसे गंभीरावस्था में एमव्हाय हास्पीटल लाया गया। जहां डॉक्टरो ने उसे बचाने के काफी प्रयास किए, लेकिन वह नही बच सका और आखिर में डॉक्टरो ने उसे मृत घोषित कर दिया। फिलहाल अभी तक आत्महत्या के कारणो के बारे में कोई सुराग नही मिल पाया है। इंदौर पुलिस मामले की जांच कर रही है।
*छोटे भाई को देश का सबसे अच्छा क्रिकेटर बनाने का देखा था सपना-*
अपने छोटे भाई को देश का सबसे अच्छा क्रिकेटर बनाने का सपना लेकर तीन साल पहले सौरभ इंदौर गया था। वह खुद यहां रहकर एसएससी की तैयारी कर रहा था, लेकिन न जाने उसे ऐसी कौन सी बात सता रही थी, जिसके कारण उसने इतना बड़ा कदम उठाने की हिम्मत कर ली। उसके दोस्तो ने बताया वह 2020 की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा था। उसकी मम्मी की तबीयत खराब थी। इसके लिए वह दो महीने तक पेटलावद में रहा। अभी चार दिन पहले ही वह इंदौर आया था और सोमवार को उसने यह बड़ा कदम उठा लिया।
*हंसमुख था सौरभ, सबसे टेलेंटेड हीरा खोया-*
सौरभ हंसमुख मिजाज का था। वह पढ़ाई में ही व्यस्त रहता और अपने काम से काम रखने के स्वभाव का युवा था। वह किसी ऐसी बात तो लेकर काफी दिनो से तनाव में था, जो उसे बार-बार अंदर ही अंदर कचोट रही थी। बताया यह भी जा रहा है कि सौरभ को कोई जॉब नही मिल रही थी, तो इसके चलते भी वह लगातार परेशान था और डिप्रेशन में शायद उसने इतना बड़ा कदम उठा लिया। खैर जो भी कारण हो, लेकिन इस जंग में जिंदगी हार गई और मौत जीत गई। उसके कोच रहे भरत चौधरी बताते है कि जब वह स्कूल में पढ़ता था तो क्रिकेट में वह आलराउंडर खिलाड़ी था और गजम का स्टेमिना था। वह सभी खिलाडिय़ो में जीत का जज्बा पैदा करते हुए अंत तक मैदान में जूझता था। उसकी मौत से ऐसा लग रहा है कि पेटलावद ने सबसे टेलेंटेड हीरा खो दिया है।
*अंतिम संस्कार में हुई सभी की आंखे नम-*
सौरभ की अंतिम यात्रा उनके निवास स्थान गणेश चौक से निकाली गई। अंतिम यात्रा में उसके दोस्त्रो, रिश्तेदारो और गणमान्य नागरिक शामिल हुए। नगर के पंपावती नदी के तट पर बने मुक्तिधाम पर सौरभ का अंतिम संस्कार किया गया। यहां सभी की आंखो से आंसू बह निकले, क्योकि हर किसी का चहेता और हंसमुख मिजाज रखने वाला सौरभ यूं इतनी जल्दी उनके बीच से चला जाएगा, यह किसी ने नही सोचा था।