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पेटलावद ब्लास्ट चौथी बरसी; वो तीन पोटलियोंं में शव किसके थे; क्या वो केवल अवशेष थे…?

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सलमान शैख़@ झाबुआ Live

पेटलावद हादसे के चार साल बाद भी राजेंद्र कांसवा की मौत पर पीडित परिवार यकीन नही कर रहे हैं दूसरी ओर कुल 78 मौतों में से 74 नामों की बात प्रशासन ने कह दी थी। 75 वां नाम राजेंंद्र कांसवा का इसमें जुड गया। लेकिन अब बडा प्रश्र चार साल बाद भी खडा हैं कि पुलिस ने जो चार पोटलियों में चार लोगों के शव को इंदौर में रखे थे उनमें से शेष बची तीन में वो आखिर किसके हैं ? पहले ही उन पोटलियों में शव कम ब्लास्ट में मारे गए लोगों के अंग अधिक थे। ऐसे में अब मुश्किले बढती नजर आ रही हैं। 13 सितंबर 2015 को चिकित्सालय ने 8 पोटलियां भेजी थी जिनमें से 4 की पहचान करके परिजन उन्हे ले आए थे।

हकीकत प्रत्यक्षदर्शीयों की माने तो जो 78 जाने गई हैं उनमें से उनमें से यादातर शव ऐसे थे जिनका अंतिम संस्कार अधूरे शवों के साथ ही ही हुआ। ब्लास्ट इतना खतरनाक था कि दूर-दूर तक के लोगों के चिथडे उड गए। शव जो पहुंचे वो लगभग शत विज्ञिप्त हालत में थे। यादातर लोगों को परिजनों ने उनके कपडों, उनके हाथ पैर पर लिखी निशानी ओर उनके जेबों में से निकली सामग्री से पहचाना गया। हादसे के 1460 दिन बीत जाने के बाद भी जहां प्रशासन 3 मौतों को अज्ञात मानकर उनके शवों को इंदौर चिकित्साल में होना मान रहा हैं। वास्तिवकता में उनका अभी तक कोई रहखबर नही आया। आज तक पुलिस थाने में एक भी व्यक्ति की गुमशुदगी दर्ज नही हो पाई।

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