सिलीकोसिस से तिल तिल कर मर गये 51 लोग, सरकार के पास नाम तक नही !

झाबुआ लाइक डेस्क के लिऐ ” एम गोयल ” लाइव 

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सिलीकोसिस से अब तक राणापुर इलाके मे दर्जनो मौत के बावजूद भी ” सिलीकोसिस पीडित ” मुआवजे या पुनर्वास पैकेज को तरस रहे है आलम यह है कि इन पीड़ितों को मे से कईयो को यह तक नही मालूम कि उनके नाम उस सूची मे शामिल है भी कि नही जिस सूची के आधार पर मामला सुप्रीम कोर्ट मे है अपना नाम पता ना चल पाने की एक बडी वजह यह भी है कि राणापुर तहसील ओर ब्लाक मेडीकल आफिस से इन्हें संतोषजनक जवाब ना मिलना ।

तडवी का दावा – सिलीकोसिस से 51 लोगो की हो चुकी मौत ।

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राणापुर के ही ग्रामीण पृष्ठभूमि के वार्ड रामपुरा मे ” सिलीकोसिस ” से अब तक 15 सालो मे 51 लोग मारे जा चुके है यह दावा है रामपुरा के तडवी दितीया पिता धूलिया का । बकौल दितिया कई लोगो को मरे हुऐ 10 से 17 साल हो चुके है उन बेचारों का तो रिकार्ड ही नही है दितिया के अनुसार रामपुरा के नाथू पिता धुलिया का तो पूरे परिवार के ही 9 लोगो को  ” सिलीकोसिस ” ने लील लिया है ।रामपुरा के लोगो के अनुसार ” कानो धुलिया , चेनिया पिता काना , नरु कानो , राजली पति दितिया , कलिया हुरा , मोसम हुरा , मांगू रामा,कमली मांगु , भीमा तौलिया , खीमा तौलिया , पेमा तौलिया आदि नाम शामिल है । तडवी ही अनुसार रामपुरा ही लोगो ने गुजरात के ” गोधरा” की ” जमुना” फैक्ट्री मे काम किया था

सिलीकोसिस से पूरा परिवार की मोत

इस गम्भीर बीमारी सिलीकोसिस से पीड़ित रानापूर के रामपुरा के नाथु पिता धुलिया का पूरा परिवार कि मोत हो गई जिसमें , सरदार पिता नाथु, धुँधली पिता नाथु, गीता पिता नाथु, बेटा चुनू पिता नाथु,दोनो पत्नी नबुड़ि पति नाथु, पत्नी रसु पति नाथु ,नाथु बहु चमरी पति रमेश नाथु भाई सभी की मोत हो गई। पूरे परिवार   में नाथु का पोता  राका पिता चुनूँ,  एक ही बचा 9 लोग परिवार में 1 बचा हे

अंतिम फैसले पर लगी है सबकी नजरे

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सिलीकोसिस पीडितो की लडाई देश के राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग सहित देश के आधा दर्जन से अधिक संगठन ओर दो दर्जन से अधिक सामाजिक कार्यकर्ता लड रहे है फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट मे है ओर अंतिम सुनवाई के लिऐ 17 नवंबर की तारीख लगी हुई है उस दिन सुप्रीम कोर्ट या तो फैसला सुना सकता है या फैसला सुरक्षित कर सकता है ।

2005 से शुरु हुई थी कानूनी जंग

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सिलीकोसिस पीडितो की लगातार मौते हो रही थी ओर सरकार गंभीर नही थी गुजरात की फैक्टरियों मे काम करने के बावजूद गुजरात सरकार यह मानने को इसलिए तैयार नही थी कि वहां की फैक्ट्रीयों मे मजदूरो का पंजीयन बदल दिया गया था । ओर एमपी सरकार अपने ही नागरिकों की लडाई लडने को तैयार नही थी ऐसे मे 2005 मे सबसे पहले ” प्रसार” नामक संगठन ने सुप्रीम कोर्ट मे याचिका लगाई थी 2006 मे ” नई शुरुआत नामक संस्था भी रिट मे शामिल हो गयी थी 2009 मे राष्टीय मानव अधिकार आयोग भी इसके मुआवजा देने की मांग करते हुए पार्टी बन गया था इन सभी संगठनो की ओर से 238 लोगो की मौत ओर 304 पीडित होने की सूची भी सुप्रीम कोर्ट मे पेश की गयी थी इस पर सुप्रीम कोर्ट मे सन 2012 मे आदेश दिया था कि राष्टीय मानव अधिकार आयोग अपने जरिए  इस सूची को आधार मानकर मृतकों के परिजनो को 3 – 3 लाख का मुआवजा गुजरात सरकार से दिलवाना ओर जो पीडित है उनके इलाज ओर भत्ते के साथ एमपी सरकार पुनर्वास पैकेज दिलवाना सुनिश्चित करवाये ।मगर अफसोस कि दोनो सरकार ऐसा नही कर पाई तो खुद राष्टीय मानव अधिकार आयोग के नेतृत्व मे सारे संगठन फिर से सुप्रीम कोर्ट चले गये ओर अब अंतिम सुनवाई की तारीख 17 नवंबर है  ।

क्या है सिलीकोसिस यह भी समझ लीजिए

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सिलीकोसिस क्या है इस बारे मे इस आदिवासी अंचल के ज्यादातर लोग अनभिज्ञ है दरअसल पत्थर की फैक्ट्रीयो मे काम करने के दोरान जो पत्थर पीसा जाता था उसकी धूल ( डस्ट ) सांस के जरिए मजदूरो के फेफड़ों मे चली जाती है ओर फेफड़े का तरल पदार्थ ” फ्लूट” धीरे धीरे सुखने लगता है परिणाम स्वरूप धीरे धीरे मजदूर खाट पकड लेता है ओर तीन से पांच साल के भीतर उसकी मौत हो जाती है ।

अब तक 1000 से अधिक मौतें

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चुंकि मध्य प्रदेश सरकार ओर झाबुआ जिला प्रशासन ने विगत दो दशक मे कभी भी सिलीकोसिस पीडितो ओर मृतकों का सर्वे नही करवाया है इसके सरकार के पास आकडे ही नही है गैर सरकारी संगठनो के आंकड़ो पर ही सरकार निर्भर है हकीकत मे 1000 से ज्यादा लोग झाबुआ – अलीराजपुर – धार जिले के मारे जा चुके है मगर इस समय सुप्रीम कोर्ट मे जो आंकड़े है उसके अनुसार 1702 लोग इसका अभी भी शिकार है ओर 503 लोगो की मौत हो चुकी है ।

उम्मीद मिलेगा पीड़ितों को न्याय

कई वर्षों से इन इस बीमारी से मोत हुई उनके परिवारो को कोई सहायता नहीं मिली। मानव अधिकार आयोग हाई कोर्ट मामला चल रहा हे उम्मीद हे की 17 नवंबर आने वाले फ़ेसले न्याय मिलेगा।—–कल्याण जैन ( समाजसेवी)

यह बोले जिम्मेदार

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हमारे पास कुछ 8 से 10 वर्ष पहले कुछ मरीज़ इलाज के लिए आए थे। उसने कुछ पीड़ित सही होने कुछ दिन बाद मोत हो गई थी। अभी कुछ वर्षों कोई मरीज़ नहीं आया। अभी हमारे पास कितने लोग आए थे।इसका कोई नया आँकड़ा नहीं हे ——-उषा गहलोद ( सीबीएमओ रानापूर)