सात दिनों तक तीर्थेन्द्रधाम में बहेगी ज्ञान गंगा
झाबुआ। कृष्ण एक क्रांतिकारी व्यक्तित्व है। लोगों के मनों की दूरिया मिटा कर उन्होंने प्रेम का संदेश प्रसारित किया। घृणा, द्वेष आदि दुर्भावों को दूर करने का महान कार्य किया। राधा और कृष्ण का संबंध आत्मा तथा परमात्मा का अलौकिक नाता है। अपने भीतर छिपा हुआ परमात्मास भी प्रेम के अभाव में दिखलाई नही पड़ता। मुश्किल की घड़ियों में भी हिम्मत उन हारने और मुस्कराने का नाम है कृष्ण। उनका चरित्र कोई सामान्य किस्सा कहानी नहीं बल्कि एक समग्र जीवन दर्शन है। कृष्ण तो खिलखिलाता हुआ युगधर्म है।भक्ति हमें निर्भय तथा प्रसन्न बनाती है। भक्त किसी भी परिस्थिति में उदास नहीं होता। भगवान के नाम का बल संसार का सर्वश्रेष्ठ बल होता है। भागवत हमें जीवन जीने की कला सिखाती हैै, जिसका जीवन मंगलमय बन गया, उसका मरण अवश्य ही महामहोत्सव बन जाता है। कथा मनोरंजन नही आत्ममंथन का साधन है। कथा सुनकर ही हमे अपने अपराधों का बोध न हुआ और प्रायश्चित का संकल्प जाग्रत नहीं हुआ तो हमारा सारा श्रमण व्यर्थ हो जाएगा। ओल्ड हाउसिंग बोर्ड कालोनी स्थित तीर्थेन्द्रधाम पर आज से प्रारंभ हुई श्री भागवत कथा में उपस्थित श्रद्धालुओं को श्री मदभागवत के माहत्म्य पर प्रकाश डालते हुए पूज्य डा. स्वामी श्री कृष्णषरण देव महाराज ने बताया कि संसार का स्वरूप तो गुण दोष मय है किन्तु विवेकी साधक सारग्रही होता है साधना में सफलता उसी को प्राप्त होती है जो नियम और निष्ठा की रक्षा करता है।
इसके पूर्व रविवार प्रातः 9 बजे से ही पूरा नगर ही श्रीकृष्ण भक्ति में डूबा हुआ नजर आया । स्थानीय तीर्थेन्द्रधाम पूरानी हाउंसिग बोर्ड कालोनी पर प्रारंभ होने वाली श्री मद भागवत कथा रस प्रवाह के पूर्व पैलेसे गार्डन से श्रीमद् भागवत एवं पूज्य स्वामी बालकृष्ण देवजी की विशाल शोभायात्रा निकाली गइ जिसमें 108 कलश को सिर पर उठाकर एक ही परिधान में महिलाओं एवं बच्चियों ने कलशयात्रा निकाली उसकी पीछे मुख्य यजमान एसके रघुवंशी एवं उनकी पत्नी रंजना रघुवंशी द्वारा सिर पर भागवत जी को उठाकर चल समारोह में चल रहे थे। सैकड़ों की संख्या में नगर के सभी समाजजनों एवं धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने इसमें भाग लिया। राजवाड़ा चोक पर महंत मनीष बैरागी ने कलशयात्रा एवं स्वामी का पूजनादि कर पुष्पांजलि से स्वागत किया। वही चारभुजा चोराहे पर पंडित अजय रामावत ने जुलूस का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। भजनों की धुन पर अनुशासित चल समारोह से पूरा नगर भक्तिमय हो गया।
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