“जयस” के सामने BJP के साथ साथ कांग्रेस से निपटने की बढती चुनौतीया 

0
52

चंद्रभानसिंह भदोरिया @ एडिटर इन चीफ

सोशल मीडिया से उठकर आंदोलन बना आदिवासी युवा शक्ति संगठन यानी “जयस” को अब नयी चुनोती का सामना पडेगा .. BJP राज मे आदिवासियों के सवैंधानिक हको के लिए आक्रमक तरीके से सोशल मीडिया मे सक्रिय “जयस” को स्वाभाविक रुप से कांग्रेस के निकट माना जाता रहा है बीजेपी तो खुलकर “जयस” को कांग्रेस की B टीम होने का आरोप मढती आई है लेकिन कमलनाथ सरकार यानी मध्यप्रदेश मे कांग्रेस के सत्ता मे आने के बाद से “जयस” का आत्मविश्वास काफी बढा हुआ था क्योकि जयस प्रमूख ” डाक्टर हीरालाल अलावा ” खुद कांग्रेस के टिकट से मनावर से विधायक बन गये है लेकिन अब मध्यप्रदेश मे सत्ता परिवत॔न के करीब 14 महीने बाद अब सभी मुद्दो पर ना सही मगर कुछ मुद्दों पर कांग्रेस ओर जयस आमने सामने है .. बात अगर हम झाबुआ ओर अलीराजपुर जिले की करे तो यहां दो मामले बीते एक महीने मे ऐसे सामने आये जिनसे कांग्रेस ओर जयस के बीच तल्खी काफी बढ गयी है अलीराजपुर जिले के आजादनगर मे दो शिक्षकों के निलंबन को अवैध करार देकर तत्काल निलंबन वापसी की मांग पर जयस के अनशन ओर जयस के पैदल अलीराजपुर माच॔ ओर 6 दिन मे दोनो शिक्षकों की बहाली के कथित आश्वासन के बावजूद अभी तक जयस की मांग पूरी ना होना साफ संकेत है कि कांग्रेस सरकार ओर उनका प्रशाशन इस मामले मे जयस को महत्व नहीं देना चाहता .. दूसरा मामला झाबुआ जिले के घुघरी के कथित माब लीचिंग मामले का है जिसे लेकर झाबुआ मे जयस ने 6 महीने बाद 6 दिन के लिए झाबुआ कलेक्टरोरेट मे धरना ओर अनशन किया .. मांग थी कि माब लीचिंग के कथित मामले मे कुछ निर्दोष आदिवासियों को आरोपी बनाया गया है उन्हे CID की जांच की फ्रेम मे लाया जाये ओर पेटलावद के विवादास्पद टीआई दिनेश शर्मा को पेटलावद से हटाया जाये .. जयस का डेलीगेशन इस मामले मे गृहमंत्री बाला बच्चन ओर दिग्विजय सिंह से भी मिला मगर कुछ नहीं हुआ .. अंततः खुद जयस संरक्षक डाक्टर हीरालाल अलावा को झाबुआ आकर अनशन इस वादे के साथ तुडवाना पडा कि अगर 5 दिन मे टीआई पेटलावद को नही हटाया जाता ओर मामले की जांच मे SIT नही बनाई जायेगी तो वे खुद जयस टीम को लेकर झाबुआ कलेक्टर कार्यालय मे धरने पर बैठ जायेंगे .. हीरालाल अलावा की दी गयी समय सीमा समाप्त हो चुकी है अब देखना है डाक्टर हीरालाल अलावा ओर जयस मामले मे सरेंडर करते है या आंदोलन ? तीसरा मामला सामने आते आते तस्वीर लगभग साफ हो गयी है दरअसल दो शिक्षकों की बहाली ओर बेरोजगारी आंदोलन के तहत जयस ने सोमवार यानी 24 फरवरी को अलीराजपुर जिला बंद का आव्हान किया था मगर कल शाम कांग्रेस जिलाध्यक्ष महेश पटेल ने दो टूक कहा कि वह त्योहारिया हाटो मे अलीराजपुर बंद नही करने देंगे ओर कड़ा विरोध करेगे .. यह पहला ऐसा अवसर था जब कांग्रेस के किसी बडे नेता ने “जयस” को सीधा सीधा यह बताने की कोशिश की है कि जयस सिस्टम ( राजनीतिक ) का ना तोड़े .. इसके पहले दो शिक्षकों ओर झाबुआ के घुघरी मामले मे कांग्रेस सीधे फ्रंट पर नही आई लेकिन प्रशाशन को फ्रंट पर रखकर ” जयस” को यह संदेश देने की कोशिश की कि जयस उनको यानी कांग्रेस को रिप्लेस करने की कोशिश ना करे .. अगर करेगे तो जनता के बीच यही संदेश कांग्रेस दिलवायेगी की सरकार उनकी है ओर हर काम के लिए जनता या जयस पहले उनके पास आये .. इन सभी घटनाक्रमो से फिलहाल ” जयस” तमतमाया हुआ है ओर सोशल मीडिया पर जयस के लोग अपनी नाराजगी जता रहे है दरअसल जयस मे भी एक कमी साफ लगती है कि जयस मे दो फाड है कोन किस तरफ है यह भी क्लीयर नही है जयस प्रमूख डाक्टर हीरालाल अलावा सरकार का विधानसभा का हिस्सा बनकर आदिवासियो के हितों को पूरा करने को जरुरी बताते है तो कुछ जयस पदाधिकारी आदिवासी समाज के हित मे सडक पर उतरकर ताकत बताने की वकालत करते है कुल मिलाकर ” जयस” को इस बात की भी जरुरत है कि वह अपने लिए एक एकीकृत आपरेशनल कमांड बनाये जिसमे जयस के चाणक्य माने जाने वाले डाक्टर आनंद राय जैसै लोगो को अगुवाई करना चाहिऐ .. इस टीम मे जयस के पदाधिकारियों को शामिल कर किसी भी मामले मे सडकों पर उतरने के पहले ठोस रणनीति बनाने ओर फिर उसे लागू करने पर आगे बढ़ना चाहिऐ .. जयस को एक बात समझनी चाहिऐ कि भले ही कांग्रेस ने सत्ता हासिल करने मे उनका उपयोग किया हो लेकिन अगर जयस सडकों पर उतरकर आदिवासियो के मुद्दे उठायेगी उसे कांग्रेस हमेशा इसी रुप मे देखेगी कि जयस उसे यानी कांग्रेस को रिप्लेस करने की कोशिश कर रही है इसलिऐ जयस के ऐसे हर आंदोलन का कांग्रेस प्रत्यक्ष – अप्रत्यक्ष विरोध ही करेगी .. इस हालात मे बीजेपी काफी खुश है ओर खामोशी से यह सब कुछ होता देख रही है बीजेपी को लगता है कि जयस ओर कांग्रेस आने वाले दिनो मे आपस मे भिड़ेंगे तो उसका सीधा फायदा सियासत मे सीधा बीजेपी को होगा ..

अंत मे समझिए
राजनीति का शाब्दिक अर्थ होता है राज + नीति = राजनीति यानी राज करने की नीति ।।