आजादी के 73वर्ष बाद भी शिक्षा, स्वास्थ्य व मूलभूत सुविधाओं को तरसते खेड़ी के बाशिंदे, जनप्रतिनिधियों-अधिकारियों ने नहीं ली आज तक सुध, अब मतदान का करेंगे बहिष्कार

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भूपेंद्रसिंह नायक, पिटोल
पिटोल से पांच किमी दूर नेशनल हाईवे 47 से जुड़े हुए गांव खेड़ी में आजादी के बाद कोई भी मूलभूत सुविधाएं नहीं होने के कारण आज वहां के बाशिंदों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाई। गौरतलब है कि झाबुआ जनपद में क्षेत्रफल क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे बड़ी पंचायत है पूरी पंचायत 10 से 12 किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैली हुई है। इस पंचायत में कुल बारह फलिए हैं जिनमें अलग-अलग फलियों में सात प्राथमिक विद्यालय एक मिडिल स्कूल, एक हायर सेकेंडरी स्कूल, पांच बड़े आंगनवाड़ी केंद्र, दो छोटे आंगनवाड़ी केंद्र एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आदि सुविधाएं तो शासन ने दे दी है परंतु इन सुविधाओं का आम जनता को लाभ मिले इसकी व्यवस्था नहीं की है जिसके चलते खेड़ी गांव की आम जनता को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

 पंचायत में किसी भी फलियां में जाने पक्की सड़क नहीं है

खेड़ी पंचायत में कुल 12 फलिए हैं इन फलियों में आवागमन करने के लिए आजादी के बाद पूरी पंचायत में सड़क नहीं बनी, जिसके कारण गांव में कोई भी व्यक्ति बीमार हो जाए उसे हाईवे रोड तक बड़ी मुश्किल से लाना पड़ता है। रोड नहीं होने की वजह से शासन द्वारा दी गई 108 एंबुलेंस सुविधा और जननी सुरक्षा वाली गाड़ी भी किसी भी फलियों में नहीं पहुंचती है किसी महिला को जब प्रस्तुति पीड़ा होती है तो उसको 108 तक लाने के लिए खाट पर रखकर रोड तक लाना पड़ता है कभी-कभी तो रास्ते में ही प्रसूति हो जाती है। इसका मुख्य कारण गांव में कहीं भी जाने के लिए रोड नहीं है ग्रामीणों का आरोप है कि रोड की वजह से कुछ स्कूलों के अध्यापक 12 बजे आते हैं एवं 2 बजे वापस चले जाते हैं जबकि टाकिया फलिया में स्कूल तो खुलती ही नहीं वहां स्कूल परिसर में लोगों ने सोच कर गंदगी कर रखी है अगर शासन प्रशासन द्वारा पूरी खेड़ी पंचायत में रोड निर्माण नहीं करवाए तो वहां की स्कूली बच्चों का भविष्य अंधकार में होगा जबकि डूंगरिया स्कूल में 110 बच्चों को पढ़ाया जा रहा है, वहां पर नियुक्त शिक्षक राकेश सिंह कुशवाह ने बताया कि हमें रोजाना स्कूल तक आने.जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है हमारी मोटरसाइकिल स्कूल से 2 किलोमीटर दूर रख कर आते हैं।

बिजली पानी की कोई सुविधा नहीं है गांव खेड़ी में
इतनी बड़ी पंचायत में कई फलियों में बिजली के पोल तो गाड़ दिए उन पर तार भी लगा दिए पर बिजली सप्लाई नहीं की है बिजली के कर्मचारी बिजली के बिल भी नहीं देते और रुपयों की वसूली करने के लिए आ जाते हैं जब मर्जी आए तब बिजली विभाग गांव की लाइट सप्लाई बंद कर देता है और जब उनकी मर्जी होती तब चालू कर देते हैं जिससे गांव में काफी दिक्कत है होती है पूरे खेड़ी गांव में करीब 100 हैंडपंप खोदे गए हैं परंतु उनमें से केवल 20 से 25 ही चालू होंगे बाकी सब बंद पड़े हैं ग्रामीणों को कहना है कि कई बार जल यांत्रिकी विभाग आवेदन के बाद भी हैंड पंप सुधारने कोई नहीं आता वही पूरी खेड़ी में पानी के लिए नदी एवं कुओं पर आश्रित रहना पड़ता है जो गर्मी में सूख जाते हैं। नदी किनारे वाले लोग गर्मी में नदी में गड्ढा खोदकर पानी की व्यवस्था है करते हैं खेड़ी पंचायत में छोटे कुल 12 तालाब हैं पर दूसरी फसल में सिंचाई कर आमदनी बढ़ाई जाए ऐसा कोई भी बड़ा तालाब नहीं होने कारण यहां के लोगों को गुजरात में पलायन करना पड़ता है जो छोटे तालाब हैं वह भी सूख जाते हैं मवेशियों को पानी पिलाने के लिए घरों से काफी दूर नदी पर ले जाना पड़ता है।

स्वास्थ्य केंद्र है पर स्टाफ नहीं है
खेड़ी पंचायत में एक छोटा स्वास्थ्य केंद्र है परंतु वहां स्टाफ नहीं होने के कारण सभी बीमारियों के मरीजों को एवं प्रसूति वाली महिलाओं को पिटोल या झाबुआ जाना पड़ता है। खेड़ी स्वास्थ्य केंद्र पर एक नर्स की नियुक्ति है वह भी रोजाना अलग.अलग फलियों आंगनवाड़ी केंद्र पर में जाकर दवाई गोलियां वितरण करती है जिसके कारण स्वास्थ्य केंद्र पर कोई नहीं रहता है अगर स्वास्थ्य विभाग द्वारा वहां पर एक एनएम नर्स और एक नर्स की नियुक्ति कर दी जाए तो काफी हद तक प्रसूति वाली महिलाओं को राहत मिल सकती है।

शिक्षा विभाग की अनदेखी है इस गांव के स्कूलों पर
जहां शिक्षा विभाग द्वारा लाखों का बजट बनाकर खेड़ी पंचायत में सात प्राथमिक स्कूल एक मिडिल स्कूल एक हायर सेकेंडरी स्कूल के भवन तो बना दिए परंतु स्कूलों में पर्याप्त विषयों के अध्यापक नहीं है भवनों में बिजली फर्नीचर आदि की व्यवस्था नहीं होने से वहां के बच्चों को पढ़ाई में काफी परेशानी होती है इस वजह से कई बच्चे पास के गांव की प्राथमिक स्कूल पांच का नाका में पढ़ाई के लिए जाते हैं या फिर पिटोल आकर पढ़ाई करते हैं। खेड़ी गांव के ग्रामीणों का कहना है कि दूरदराज के फलियों में तो कई स्कूलों में रोजाना ताला लगा होता है जाएं स्कूल लगती है वहां मध्यान भोजन भी नहीं बनता कभी कबार बन जाता है तो एक रोटी के चार हिस्से कर बच्चों को बांट दिया जाता है वही आंगनवाड़ी केंद्रों में भी पौष्टिक आहार का वितरण नहीं होने से बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं।

सरकार की राशन की दुकान में मिलता है हमेशा राशन
खेड़ी गांव के ग्रामीणों का कहना है कि हमारे लिए एक यही सुकून भरी सुविधा की हमारे यहां खाद्य विभाग की राशन की दुकान पर सभी ग्रामीणों को समय पर राशन कार्ड के अनुसार राशन मिल जाता है परंतु उसमें भी राशन की दुकान शासकीय भवन छोटा होने से वहां पर अनाज रखने की काफी परेशानी होती है जब अनाज की दो गाड़ी एक साथ आ जाती है तो खाद्य सामग्री रखने की जगह नहीं होने कारण हमारी एक ही मांग है की राशन की दुकान के लिए नए भवन का निर्माण कराया जाए जिससे गांव में वितरण होने वाले वाली खाद्य सामग्री का समुचित रखरखाव हो जाए।

सुविधाएं नहीं तो वोट नहीं
खेड़ी के ग्रामीणों ने कहा कि वर्षों से दोनों ही राजनीतिक दलों के नेता चुनाव के वक्त आकर सुविधाओं के नाम पर बड़े.बड़े आश्वासन देते हैं कि की आप हमें चुनाव जीता ओ तो हम आपके गांव में सभी सुविधाएं मुहैया कराएंगे आपके हर फलियों में रोड बना देंगे परंतु आजादी के बाद आज तक खेड़ी में न तो कोई डामरीकरण की सड़के बनी नाही सीमेंट के सीसी रोड बने और खेड़ी पंचायत का विकास भी नहीं हुआ इसलिए आने वाले उपचुनाव में हम लोग मतदान का बहिष्कार करेंगे और हमारे गांव में रोड नहीं बना तो जन आंदोलन कर नेशनल हाईवे पर चक्का जाम करेंगे।
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