समाज के कमजोर वर्गों में संवेदनशीलता पर दो दिवसीय जिला स्तरीय सेमिनार में एएसपी ने पुलिस अधिकारियों को दी जानकारियां

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फिरोज खान, ब्यूरो चीफ अलीराजपुर
पुलिस कंट्रोल रूम अलीराजपुर में समाज के कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशीलता विषय पर दो दिवसीय जिला स्तरीय सेमिनार का आयोजन किया गया। उक्त आयोजित सेमीनार में जिलें के समस्त थाना प्रभारीगण व प्रत्येक थानों से सहायक उप निरीक्षक एवं प्रशिक्षु उप निरीक्षक मौजूद थे। सेमिनार का शुभारंभ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सीमा अलावा ने समाज के कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशीलता पर निर्देशित करते हुए बताया कि एसी-एटी एक्ट 1995 संशोधित की धारा 7 के अनुसार अन्वेषण ऐसे पुलिस अधिकारी द्वारा किया जाएगा जो उप पुलिस अधीक्षक रैंक से कम का न हो। अन्वेषण 60 दिनों में व गिरफ्तार 30 दिनों में किया जाना आवश्यक है। इस अधिनियम के अंतर्गत की जाने वाली कायमियों में फरियादी का जाति प्रमाण पत्र एसडीएम द्वारा प्रमाणित होना अब जरूरी होगा। वहीं आरोपी की जाति की सत्यता हेतु समाज के प्रतिष्ठित लोगों या आसपास के लोगों के कथन द्वारा जाति का प्रमाणन पर्याप्त है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(1) के तहत जो व्यक्ति अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है वह किसी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को घृणाजनक पदार्थ खाने के लिए विवश करने, आवास के अन्दर या बाहर कूड़ा, पशु शव या मल मूत्र इकठ्ठा करने, अपमानित करेगा या मानसिक क्षति पहुंचाने, उसके शरीर या चेहरे को पोतकर या उसे नग्न या अर्धनग्न घुमाने या जूतों की माला पहनाने, व्यक्ति के कपड़े उतरवाना, मुंडन करना या मुछे हटानने, ऐसे सदस्य के स्वामित्वाधीन आवंटित भूमि पर दोषपूर्ण कब्जा करेगा या डरा धमकाकर उसपर खेती करेने, उसे मतदान न करने या किसी विशेष व्यक्ति के पक्ष में मतदान करने के लिये विवश करेने, किसी लोकसेवक को गलत जानकारी देगा जिससे अनुसूचित जनजाति/जाति के सदस्य को क्षति पहुंचने, सार्वजनिक स्थान पर उन्हें अपमानित करने या अभद्र टिप्पणी करने, जल स्त्रोत में पानी लेने से रोकने, सदस्यों अपना गांव या मकान छोडऩे के लिये विवश करने, जातिसूचक गाली-गलौच करने, उसकी धार्मिक मान्यता वाले स्थान को अपवित्र करने पर अब 6 माह से 5 वर्ष तक का कारावास का प्रावधान व जुर्माना है।

अब यह होगी कार्रवाई-
वहीं पुलिस अधिकारियों को जानकारी देते हुए एएसपी सीमा अलावा ने कहा कि धारा 3 (2), 1 एससी-एसटी के सदस्यों के खिलाफ झूठी गवाही जिसमें उन्हें मृत्युदंड की सजा हो सकती थी तो झूठी गवाही देने वाला आजीवन कारावास या जुर्माना से दंडित होगा, किन्तु यदी मृत्युदंड दिया जा चुका है तो झूठी गवाही देने वाला भी मृत्युदंड से दण्डित होगा। वहीं 7 वर्ष से अधिक सजा वाले अपराध में झूठी गवाही देने वाले को कम से कम 6 माह और अधिक से अधिक 7 वर्ष के कारावास व जुर्माना की सजा होगी। एसटी-एसी के सदस्यों की संपत्ति को अग्नि या विस्फोट से नुकसान पहुंचाने कम से कम 6 माह और अधिक से अधिक 7 वर्ष के कारावास व जुर्माना की सजा का प्रावधान है। भारतीय दंड संहिता के अधीन 10 वर्ष या उससे अधिक के कारावास से दण्डित कोई अपराध एससी-एसटी के सदस्यों की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने आदि के लिये आजीवन कारावास व जुर्माना से दण्डनीय होगा, यदि लोकसेवक होते हुए इस धारा के अधीन कोई अपराध करता है तो कम से कम 1 वर्ष की सजा व अधिकतम उस अपराध के लिये उपबंधित सजा से दण्डित होगा।