मप्र कंप्यूटर ऑपरेटर महासंघ 17 जून को दो दिनी सांकेतिक हड़ताल पर, मांगे नहीं माने जाने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल से लेकर करेंगा आमरण अनशन

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फिरोज खान, विशाल वाणी, आजादनगर
मध्यप्रदेश कम्प्यूटर ऑपरेटर महासंघ के अन्तर्गत मध्यप्रदेश के समस्त शासकीय/अर्धशासकीय विभागों, निगम मंडलों, सहकारी, संस्थाओं आदि अन्य सभी प्रकार के विभागों में कार्यरत कम्प्यूटर ऑपरेटरों ने लामबंद होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज बुलंद की। गौरतलब है कि कांग्रेस ने आउटसोर्स-अस्थाई कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित रखने हेतु वचन पत्र में उल्लेख किया था लेकिन विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के जीत के बाद से लगातार अनेको विभागों से कम्प्यूटर ऑपरेटरों को निकाला जाता रहा है। जिससे उनके समक्ष बेरोजगारी की समस्या उत्पन्न हो गई है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में तत्कालीन अपर मुख्य सचिव जुलानिया के निर्देशन में पूर्व में जिला/जनपदों का सेटअप तैयार किया गया था जो कि उनके स्थानान्तरण होने के बाद वो सेटअप कहां दबा दिया गया किसी को कुछ नही पता है जिसके बाद जिला व जनपद पंचायत के ऑपरेटरों को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग हर माह 3 माह में एक रिचार्ज कूपन की तरह रिचार्ज किया जाता है जो कि कतई मानवीय नहीं कहा जा सकता है।

तुगलकी फरमान से निकाला जा रहा कंप्यूटर ऑपरेटरों को
बीते वर्षो में अपर मुख्य सचिव जुुलानिया ने जिला-जनपदों में कार्य कर रहे अस्थाई कम्प्यूटर ऑपरेटरों के पक्ष में कार्यवाही शुरू की थी लेकिन इसके बाद उनका स्थानान्तरण करके उन्हे अन्य विभाग की जिम्मेदारी सौपी गई। तब से लेकर आज दिनांक तक विभाग कम्प्यूटर ऑपरेटरों का मात्र रिचार्ज करने में लगा हुआ है। जबकि जिला/जनपदों में हकीकत ये है कि कम्प्यूटर ऑपरेटर सुबह ऑफिस खोलने से लेकर देर रात तक शासन की समस्त योजनाओं का संचालन करता है। और तो और अनेकों बार पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग प्रत्येक मामले में सम्पूर्ण भारत में प्रथम आता रहा है। इसका सारा श्रेय अधिकारी या स्थाई कर्मचारी ले जाते है। इसकी प्रकार वन विभाग की फाइल कई वर्षो से मंत्रालय में गोते लगा रही है क्या हो रहा है किसी को कुछ पता नहीं। अलबता अनेकों ऑपरेटरों को मौखिक रूप से अधिकारियों द्वारा तुगलकी फरमान सुनाया जाकर निकाल दिया गया है। इसी क्रम में परस्पर कृषि विभाग, खाद्य विभाग, मंडियों में कार्यरत ऑपरेटर, शिक्षा विभाग, विद्युत विभाग आदि कई ऐसे विभाग है जहां पर पूर्व से कार्यरत कम्प्यूटर ऑपरेटरों को सेवा से पृथक कर दिया गया है। शासन की समस्त प्रकार की योजनाओं के क्रियान्वयन कम्प्यूटर ऑपरेटरों द्वारा सम्पन्न की जाती है। शासन कोई योजना लांच करती है लेकिन उसका क्रियान्वयन कैसे करना है ये किसी को मालूम नहीं रहता है कम्प्यूटर ऑपरेटर ही वो प्राणी होता है जो दिन रात मेहनत करके उस योजना में प्राण फंूकता है और बाद में उसके ही प्राण ले लिए जाते हैए कहने का तात्पर्य की जब योजना सुचारू रूप से चलने लगती है तो विभाग उस योजना में बकायदा भर्ती कर नए लोगों को लगा देता है और जिसने उस योजना में अपना पूरा समय लगा दिया होता है उसको मौखिक आदेश दे कर सेवा से पृथक कर दिया जाता है। ऐसा ही मामला समग्र का हैए जिला, जनपद, नगरीय प्रशासन में इस योजना को 2012-13 में लागू किया गया विभागों में कार्यरत कम्प्यूटर ऑपरेटरों ने दिन रात मेहनत करके पूरा डाटा उस योजना में फीड किया अब जब उक्त योजना प्रत्येक जगह काम में आती है तो विभाग ने अलग से भर्ती प्रक्रिया अपनाकर स्थाई पोस्ट में ऐसे कर्मचारियों की भर्ती कर ली है।

लोकसेवा केन्द्रो को शासन ने ठेकेदारों को देकर रखा है लगातार शासन अपनी जेब से ठेकेदार को पैसा देता रहा है ठेकेदारों को क्यों पैसा दिया जाता है समझ से परे है। अगर इस घोटाले के रूप में देखे तो अरबों रूपये का घोटाला है। वन विभाग में घंटों के हिसाब से कर्मचारियों को पैसा मिलता है जो कतई मानवीय नहीं है। महिला बाल विकास में कम्प्युटर पर योजनाओं का संचालन तो होता है लेकिन भुगतान स्टेशनरी का किया जाता है मतलब कि महिला बाल विकास में कोई ऑपरेटर कार्यरत नहीं है। ये एक हास्यापद विषय है कि जब कोई ऑपरेटर कार्यरत ही नहीं है तो क्या महिला बाल विकास की योजना का क्रियान्वयन हवा में होता है या मंगल ग्रह के प्राणी आकर कर जाते है। राजस्व विभाग में भी मामला कुछ ऐसा ही है कम्प्यूटर ऑपरेटरों से कार्य लिया जाता है लेकिन भुगतान कहा से होता है किसी को कुछ नहीं मालूम विभाग में केवल एक पोस्ट है और काम इतना है कि अलग से ऑपरेटरों को लगाया जाता है लेकिन रिकार्ड में कुछ नहीं है अन्य सभी विभागों में कम्प्यूटर ऑपरेटर वर्षो से कार्यरत है लेकिन कोई रिकार्ड नहीं योजनाओ का संचालन मंगल ग्रह से आये हुए एलियन करते है शायद ये हास्यापद है और ये यह सोचने पर मजबूर करता है कि कोई भी सरकार सत्ता में हो बेरोजगारों का दुरूपयोग कैसे किया जाता है ये नेताओ को अधिकारियों को बहुत अच्छे से आता है। विभागों में कर्मचारियों द्वारा डाटा गलत दिये जाने पर कार्यवाही कम्प्यूटर ऑपरेटरों पर होती है। स्थाई कर्मचारी/अधिकारी अपना पल्ला झाड़ कर सारा दारोमदार कम्प्यूटर ऑपरेटरों पर डाल देते है।

अब कम्प्यूटर ऑपरेटरों शोषण नहीं करेंगे बर्दाश्त-
शासन को स्पष्ट संदेश है कि अगर हम कम्प्यूटर ऑपरेटरों पर सारा दारोमदार है तो शासन हमें स्थाई करे योजनाओ में पद बनाये और हमें विभागों की योजनाओं में ही स्थाई करते हुए हमारे साथ न्याय करे। जिन योजनाओं में नई भर्ती की गई है उन योजनाओं में पूर्व से कार्यरत कम्प्यूटर ऑपरेटर को भी नियमित करे। अन्यथा अब शोषण बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। मध्यप्रदेश कम्प्यूटर ऑपरेटर महासंघ सभी प्रकार के कम्प्यूटर ऑपरेटरों के साथ मजबूती के साथ खडा हुआ हैए हमारे भविष्य को सुरक्षित नही किया गया तो विरोध स्वरूप अनिश्चित कालीन हड़ताल से लेकर आमरण अनशन तक किया जा सकता है। चेतावनी के रूप में 17 जून से दो दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की जा रही है। इसके बाद भी अगर कम्प्यूटर ऑपरेटरों के भविष्य के संबंध में स्थाई हल नहीं किया गया तो अनिश्चित कालीन हड़ताल की जाएगी। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के बाद अब लोकल स्तर के चुनाव होने को है। जिसमें अधिकांश कार्य कम्प्यूटर ऑपरेटरों के द्वारा किया जाता है। अब देखना है कि सरकार इन अस्थाई कर्मचारियों को अपने पक्ष में रखतें हुए कार्रवाई करता है या कर्मचारियों को विरोध में रखकर लोकल स्तर के चुनाव सम्पन्न कराएंगे।

 

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