कलेक्टर को लापरवाही पर क्यों आया गुस्सा, किन्हें लगाई फटकार, पढ़िए पूरी ख़बर

  • पल्स  पालियो टीकाकरण अभियान के पूर्व छुटे हुए बच्चों की सूची सभी संबंधित मैदानी अमले के पास उपलब्ध होना चाहिए।

  • जिले में पल्स पोलियों अभियान से वंचित डार्क एरिया का चिन्हांकन किया जाए।

  • डार्क एरिया पर विशेष ध्यान दिया जाए।

  • इसके लिए विस्तृत रूप रेखा तैयार की जाए।

अलीराजपुर, हमारे प्रतिनिधिः उक्त निर्देश कलेक्टर शेखर वर्मा ने गत दिवस मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में सम्पन्न पल्स पोलियो अभियान की जिला टास्क फोर्स समिति की बैठक में संबंधित अधिकारियों को दिए। बैठक में सीईओ जिला पंचायत अमरसिंह बघेल, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला टीकाकरण अधिकारी, सिविल सर्जन एवं सभी संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

डार्क एरिया कौन सा है इसकी जानकारी दी जाए:

कलेक्टर वर्मा ने डीपीएम को सख्त निर्देश दिए कि जिले में लगभग 14 हजार बच्चे टीकाकरण से वंचित रह गए है। इन बच्चों की सूची सभी संबंधित मैदानी अमले को उपलब्ध कराई जाए। जिले में पल्स पोलियों अभियान से वंचित डार्क एरिया कौन सा है इसकी जानकारी दी जाए। डार्क एरिये पर विशेष ध्यान दिया जाए। यह अभियान महज औपचारिकता निभाने के लिए न चलाया जाए। चिकित्सा विभाग के मैदानी अमले की इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका है। मैदानी अमले को निर्देशित किया जाए कि वे बच्चों को अनिवार्यतः पल्स पोलियो की दवा पिलाए। कोई भी लक्षित बच्चा छूटना नहीं चाहिए।

केवल जानकारी पढ़कर सुनाने से काम नहीं होगा:

कलेक्टर श्री वर्मा ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा डीपीएम से सख्त लहजे में कहा कि केवल जानकारी पढ़कर सुनाने से काम नहीं होगा। बैठक में आंकड़ेबाजी दिखाने की अपेक्षा अभियान के लिए क्या रूपरेखा तैयार की गई है, उससे अवगत कराया जाए। सबसे पहले डार्क एरिया को चिन्हित किया जाए। जो कमियां पिछले अभियानों में रह गई थी उन्हें दूरूस्त किया जाए। शासन के निर्देशों का अक्षरशः पालन किया जाए। अभियान में कर्तव्यनिष्ठ लोगों की ही ड्यूटी लगाई जाए।

करो-धरो कुछ नहीं और बस ज्ञान बांट दो:

कलेक्टर श्री वर्मा ने बैठक में निर्देश दिए कि राज्य बीमारी सहायता के प्रकरण एकत्र कर एक साथ थोक में न भेजा जाए। राज्य बीमारी सहायता के प्रकरण जब भी आए उसे तत्काल कार्यालय को भेजा जाए। अनावश्यक अन्य प्रकरण के आने का इंतजार न करें। उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि 6-6 माह तक अस्पताल का जनरेटर ठीक न होना शर्मनाक बात है। एक्स-रे काले होने के लिए लोडसेंटिंग का बहाना बनाया जाता है। करो-धरो कुछ नहीं और ज्ञान बांट दो इससे कुछ नहीं होता। उन्होंने संबंधित को निर्देश दिए कि अस्पताल का विद्युत कनेक्शन शहरी क्षेत्र के फीडर से जुड़वाएं।

रीलवर्क और रियलवर्क में अंतर होता है:

कलेक्टर श्री वर्मा ने बैठक में निर्देश दिए कि जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या अधिक है। उन्हें थर्डमील प्रदान किया जा रहा है। शासन द्वारा थर्डमील के लिए अत्यधिक राशि उपलब्ध कराई जा रही है। रीलवर्क और रियलवर्क में अंतर होता है। चिकित्सा विभाग के मैदानी अमले को निर्देशित करें कि वे इन लगभग 4500 अतिकुपोषित बच्चों की माताओं का नियमित चैकअप करें। उनको आवश्यक दवाएं प्रदाय की जाए। उनका स्वास्थ्य परीक्षण कार्ड तैयार किया जाए भ्रमण के दौरान स्वास्थ्य परीक्षण कार्ड चैक किया जाएगा। साथ ही संबंधितों से जानकारी ली जाएगी। इस कार्य में यदि लापरवाही बरती गई तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी।

हर काम को किसी न किसी बहाने से न करने की कसम खा रखी है:

कलेक्टर श्री वर्मा ने एनआरसी की समीक्षा करते हुए कहा कि जिले में एनआरसी में भर्ती बच्चों की संख्या अत्यंत कम है। यह स्थिति बड़ी शर्मनाक हैै। शत प्रतिशत अतिकुपोषित बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराया जाए। संबंधितों को कारण बताओं सूचना पत्र जारी किया जाए। जिले में लगभग तीन हजार से अधिक संस्थागत प्रसव अंतर्गत जननी सुरक्षा योजना की राशि संबंधितों को नहीं मिल पाई है। बैंक में खाता न होने का बहाना बनाने से काम नहीं चलेगा। हर काम को जब किसी न किसी बहाने से न करने की कसम खा रखी है तो काम कैसे पूर्ण होगा। आपके अकाउंटेंट ने क्या प्रयास किए, कितनी बार बैंक से सम्पर्क किया। संबंधित को एक वेतनवृद्धि रोकने का नोटिस जारी किया जाए।

छकतला की एएनएम ने एक वित्तीय वर्ष में 635 संस्थागत प्रसव कराए:

कलेक्टर श्री वर्मा ने संस्थागत प्रसव की समीक्षा करते हुए कहा कि जिले की एक एएनएम एक वित्तीय वर्ष में 635 संस्थागत प्रसव करा सकती है तो फिर पूरा अमला होने के बाद अन्य चिकित्सालयों की स्थिति इतनी खराब क्यों है। इन शासकीय सेवकों को नोटिस जारी किए जाए। साथ ही इनकी विस्तृत जानकारी दी जाए, जिससे इनके विरूद्ध आवश्यक कार्य की जा सकें। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की साप्ताहिक समीक्षा की जाएगी।

प्रशिक्षण कार्यक्रम गुपचुप तरीके से क्यों आयोजित किए जा रहे:

बैठक में बताया गया कि कुछ शासकीय सेवक प्रशिक्षण के लिए बाहर भेजे गए है। इस पर कलेक्टर श्री वर्मा ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि पहले भी समस्त विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि कोई भी विभाग मनमाने ढंग से प्रशिक्षणों का आयोजन नहीं करेगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम गुपचुप तरीके से आयोजित ना किए जाए।

प्रशिक्षण में भेजने से पूर्व संबंधित कार्यालय में जिम्मेदार की उपलब्धता सुनिश्चित की जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि शासकीय या अशासकीय संस्थाओं द्वारा दिए जाने वाले समस्त प्रशिक्षणों से पूर्व जिला कार्यालय,संबंधित एसडीएम और तहसीलदार को प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देंगे। कुछ विभागों के प्रशिक्षणों का संचालन एनजीओ द्वारा भी प्रदाय किया जाता है। ऐसे प्रशिक्षणों की विषयवस्तु सहित समस्त जानकारी पूर्व से दी जाए।