कलेक्टर का आदेश, छात्रावासों एवं आश्रमों में ठण्ड से बचाव के आवश्यक इंतजाम करें

अलीराजपुर, एजेंसीः कलेक्टर श्री शेखर वर्मा ने बताया कि शीतलहर के मद्देनजर छात्रावासों एवं आश्रमों में निवासरत विद्यार्थियों की ठंड से बचाव हेतु व्यवस्था का निरीक्षण करने के लिए अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। उन्होंने बताया कि अधिकारियों शाम को समस्त छात्रावासों एवं आश्रमों का भ्रमण कर निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए है। उन्होंने निरीक्षण का पालन प्रतिवेदन दो दिवस में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है।

छात्रावासों एवं आश्रमों का निरीक्षण करें:

कलेक्टर श्री वर्मा ने सहायक आयुक्त आदिवासी विकास सहित अन्य विभागों के अधिकारियों निर्देश है कि जिले का सघन भ्रमण कर समस्त छात्रावासों एवं आश्रमों का निरीक्षण करें। निरीक्षण के दौरान देखे कि छात्रावासों एवं आश्रमों में शीतलहर के कारण कप-कपाती ठंड से बचाव के लिए बच्चों के रूमों में ओढ़ने-बिछाने के लिए रजाई, गद्दे, कंबल इत्यादि की समुचित व्यवस्था है अथवा नहीं। बच्चों के स्नान हेतु गर्म पानी की व्यवस्था है या नहीं। छात्रावास में निवासरत् बच्चों से भी चर्चा करें तथा उनके भोजन, स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के साथ ही बैड के साथ कंबल व रजाई की व्यवस्थाओं के संबंध में भी चर्चा करें। बच्चों का स्वास्थ्य चेकअप समय पर होता है या नहीं इसकी भी जानकारी ली जाए। साथ ही अध्ययन-अध्यापन से संबंधित व्यवस्थाओं पर विस्तृत चर्चा करें। बच्चों के लिए आवश्यकता अनुसार अलाव की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए।

अनियमितता पाए जाने पर छात्रावास अधीक्षक के विरूद्ध कार्यवाही होगी:

कलेक्टर श्री वर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले के समस्त छात्रावासों में छात्र-छात्राओं द्वारा आवश्यकतानुसार सामग्री जैसे रजाई, गद्दे, कंबल, पलंग इत्यादि क्रय की जानी थी। इस कार्य हेतु राशि संबंधितों को आवंटित कर दी गई है। निरीक्षण के दौरान छात्र-छात्राओं द्वारा क्रय की गई सामग्री का भौतिक सत्यापन करें कि सामग्री वास्तव में खरीदी गई अथवा नहीं। सामग्री उच्च गुणवत्ता की है अथवा नहीं इसका भी परीक्षण किया जाए। अनियमितता पाए जाने पर संबंधित छात्रावास अधीक्षक के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रस्तावित की जाए।

सार्वजनिक स्थलों पर आवश्यकतानुसार रात्रि के समय अलाव जलाए:

कलेक्टर श्री वर्मा ने संबंधितों को निर्देश दिए कि शीतलहर के प्रकोप को देखते हुए सार्वजनिक स्थलों पर आवश्यक संख्या में रात्रि के समय अलाव भी जलाए,जिससे लोगों को आग का सहारा भी मिल सके। इस बात का भी जायजा लिया कि कोई असहाय व्यक्ति खुले में या सड़क पर तो नहीं सो रहा है।