पीयूष चन्देल, अलीराजपुर स्थानीय असाड़ा राजपूत समाज द्वारा कोरोना वायरस के प्रकोप से बचाव हेतु लाॅक-डाउन के कारण विशेषकर निर्धन वर्ग दैनिक श्रमिक, घुमक्कड़, बेसहारा गरीबों की भरण पोषण की मुख्य परेशानी के मद्देनजर उन्हें खाद्य सामग्री वितरित की गई । इस वैश्विक संक्रामक बीमारी कोरोना के प्रकोप से पूरा विश्व त्रस्त हैं, परन्तु सबसे ज्यादा झुग्गी झोपड़ियों के रहवासियों, ठेला व्यवसायी, निर्धन वर्ग दैनिक श्रमिक, यायावर जीवन जी रहे लोग जो लॉक-डाउन होने से रोजी रोटी का संकट होने से भरण-पोषण हेतु प्रभावित हो रहा हैं। इस विषम परिस्थितियों में समाज द्वारा अभियान चलाया जाकर उन जरूरतमंद, असहाय लोगों को मानवता व सामाजिकता की भावना प्रकट कर अन्नदान कर सहयोग किया जा रहा है। उन्हें सेनेटाईजर से हाथ धुलवाकर कोराना से हो सकने वाली त्रासदी अवगत कराकर सोशल डिस्टेंन्स व मास्क के उपयोग की समझाईश दी एवं करोना से बचाव हेतु घर में रहे, सुरक्षित रहने की हिदायत दी । असाड़ा राजपूत समाज के अध्यक्ष राजेश सिंह राठौर के नेतृत्व में समाज के अनुसांगिक संगठनों प्रेरणा क्लब, सृजन संस्था, जिला अखिल भारतीय राजपूत क्षत्रिय सभा, रॉयल राजपूत संगठन एवं जय राजपूताना संघ जिला आलीराजपुर के सदस्यों द्वारा नगर के रहवासी, जरूरतमन्द परिवार को खाद्य सामग्री दाल , चावल , गेहूँ का आटा , व नमक आदि सामग्री के करीब 300 पैकेट रेल्वे ब्रिज दशहरा मैदान, वेअरहाउस बोरखड , सेमलपाटी, मेला मैदान, डाॅन बाॅस्को रोड , राजवाडा महल के पास, बहारपुरा , काजु विकास रोड, एस.पी.आफिस के पास आदि क्षेत्रों में वितरित किये गये । इसमें सभी राजपूत समाजजनों ने सराहनीय सहयोग प्रदान किया है। समाज के मीडिया संयोजक उमेश वर्मा कछवाहा व राकेश चौहान ने बताया हैं कि देश की वर्तमान में कोरोना वाइरस संक्रमित बीमारी के चलते जो लॉक-डाउन की स्थिति हुई है। हम कोशिश करेंगे कि आगामी दिनों में भी प्रशासन के मार्गदर्शन में अन्नदान योजना की सेवा सतत् जारी रहेगी। इस अभियान में समाज के सदस्यों का तन मन धन से सराहनीय सहयोग प्राप्त हो रहा हैं। वही साथ में इस प्रकल्प में भारतीय मूल के विदेश में निवासरत समाजबंधुओं से भी आर्थिक सहयोग प्राप्त हो रहा हैं । Post navigation 10 किलोमीटर पैदल चलकर दो दिनों के भूखे 25 श्रमिकों के दल को मिला नागरिकों का साथ, नहीं मिला प्रशासन से सहयोग लॉकडाउन में व्यापारी बेच रहे दोगुने कीमते में खाद्य सामग्री, महामारी के बाद आम लोगों की महंगाई ने कमर तोड़ी, प्रशासन उदासीन