अर्पित चोपड़ा@खवासा

ज्ञान-ध्यान और भगवान में रहना म्यान में रहने के समान है। जब तक कटार म्यान में रहती है तो वो केला भी नहीं काट सकती है परंतु वहीं कटार म्यान से निकलने पर गला काट सकती है । जबान भी कटार के समान है इसलिए इसे भी म्यान में ही रखना चाहिए। क्योंकि ये जब-जब भी अपनो म्यान से बाहर आई है जिसने विनाश ही किया है । ज्ञान का भूषण ध्यान है, ध्यान का भूषण त्याग है और त्याग का भूषण शांति है और जिसे शांति मिल जाती है उसे श्रधांजलि की जरूरत नहीं होती है। यदि आत्मा में त्यागवृत्ति पैदा नहीं हुई तो सारा ज्ञान – ध्यान नष्ट हो जाता है । उक्त उद्गार मालव माटी के संत, माँ सरस्वती के वरद पुत्र, प्रसिद्ध कथाकार संतश्री पंडित कमल किशोरजी नागर ने श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन व्यक्त किए। संतश्री ने कथा सुनाते हुए कहा कि कथा में बैठना ईश्वर से रूबरू होने के समान है । संसार में देने वाले बहुत धुरंधर बैठे है किंतु लेने वाले पात्र मिलना कठिन है। संतश्री ने कहा कि कान से लिया (सुना) हुआ जहर मुँह से लिए हुए जहर से भी खतरनाक होता है। मुँह से लिया हुआ जहर केवल खाने वाले का शरीर खत्म करता है किंतु कान से लिया हुआ जहर स्वयं के साथ – साथ माता-पिता, पत्नी-बच्चे और पड़ोसियों तक को दुखी कर देता है। पंडित नागरजी ने समाज मे व्याप्त कुरीतियों पर हमला बोलते हुए कहा कि आज कल्याणी महिलाओं को अपशुकन तिरस्कारपूर्ण दृष्टिकोण से देखा जाता है। हमे ये परिस्थितियां बदलनी होगी । संतश्री ने श्रोताओं से आव्हान करते हुए कहा कि आज हमे कल्याणी महिलाओं को आगे लाना चाहिए और सभी सुगन, दस्तूर इनसे करवाकर समाज मे व्याप्त कुरीतियों को खत्म करना चाहिए ।

*कृष्ण जन्मोत्सव मनाया*
श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन हजारों लोगों की उपस्थिति में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया । जन्मोत्सव के दौरान पूरा पांडाल भाव-विभोर होकर नाच उठा । इस अवसर पर रतलाम-झाबुआ संसदीय सीट से सांसद कांतिलाल भूरिया, पूर्व विधायक वीरसिंह भूरिया, सुरेशचंद्र जैन (पप्पू सेठ) भी कथा में शामिल हुए ।

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