भूपेंद्र नायक, पिटोल

माँ पावागढ़ वाली महाकाली के प्रति अटूट श्रद्धा और विश्वास के साथ पिटोल से पावागढ़ तक 52 गज की पवित्र ध्वजा लेकर धार्मिक यात्रा का शुभारंभ हुआ। इस यात्रा में बावड़ी छोटी के जनजाति समाज के पुरुषों एवं मातृशक्ति ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी पिटोल से 3 किलोमीटर दूर स्थित गांव बावड़ी छोटी के भगत समाज के जनजाति भाई-बहनों द्वारा नवरात्रि के पावन पर्व पर इस महायात्रा का आयोजन किया गया है। गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान के विभिन्न जिलों के जनजाति समाज में सनातनी संस्कृति की अलख जगाने वाले गुजरात के आदिवासी संत शिरोमणि गंगूराम महाराज के अनुयायियों द्वारा यह धार्मिक यात्रा आयोजित की जाती है। यह यात्रा बावड़ी छोटी के भगत समाज के कीनू भाई सीताराम की देखरेख में पावागढ़ तक जाएगी।

माता के भव्य रथ के साथ श्रद्धालु माताजी के भजनों पर झूमते-गाते हुए उत्साह के साथ आगे बढ़ रहे हैं। इस यात्रा में बावड़ी के करीब 250 पुरुष, महिलाएँ और बच्चे शामिल हैं। गुजरात में प्रवेश के बाद वहाँ के भगत समाज के लोग भी धीरे-धीरे इसमें जुड़ते जाएंगे, जिससे इस धार्मिक यात्रा का कारवां और विशाल होता जाएगा।

आज इस यात्रा ने बैतूल-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित श्री संकट मोचन सिद्ध हनुमान मंदिर से सुबह 11 बजे पावागढ़ के लिए प्रस्थान किया। इस अवसर पर पिटोल के सर्व समाज के लोगों ने उपस्थित होकर यात्रा के निर्विघ्न सम्पन्न होने के लिए माँ कालिका से प्रार्थना की।

माँ महाकाली के दरबार में 52 गज की ध्वजा अर्पित करने के पावन संकल्प के साथ श्रद्धालु भक्ति भाव से यात्रा पर निकले हैं। श्रद्धा और विश्वास से ओतप्रोत यह पहल समाज में धार्मिक चेतना, एकता और भाईचारे का संदेश दे रही है। यह धार्मिक यात्रा समाज की आस्था, सांस्कृतिक परंपराओं और आध्यात्मिक ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

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