राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने की राज्य सरकार की सराहना, कहा- समय से पहले पूरा हो गया स्क्रीनिंग का लक्ष्य
दिनेश वर्मा, झाबुआ
‘अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस के अवसर पर इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण चुनौती का सामना करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। इस आयोजन से जुड़े सभी लोगों की मैं सराहना करती हूं। राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के अंतर्गत मध्य प्रदेश ने जो बहुआयामी उपलब्धियां हासिल की हैं, उसके लिए मैं राज्य सरकार की सराहना करती हूं। यह संतोष की बात है कि वर्ष 2023 में राष्ट्रीय मिशन का शुभारंभ करते समय जो अनेक बड़े लक्ष्य देश के सामने रखे गए थे, उनमें से स्क्रीनिंग का लक्ष्य समय से पहले ही पूरा हो गया।’ यह बात राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कही। राष्ट्रपति मुर्मु 19 जून को विश्व सिकल सेल दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। यह कार्यक्रम खंडवा जिले के ओंकारेश्वर में राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन-2047 के तहत आयोजित किया गया। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में राज्यपाल मंगु भाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम और राष्ट्रीय गान जन गण मन के साथ हुई। इस दौरान सिकल सेल एनीमिया पर केंद्रित लघु फिल्म और जागरूकता के लिए बनाए गए वीडियो का भी प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन- 2047 में उत्कृ्ष्ट कार्य करने वाली ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधि और अधिकारियों को सम्मानित किया गया।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि मुझे बताया गया है कि नवजात शिशुओं से लेकर 40 वर्ष की आयु तक के 7 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य पूरा हो चुका है। यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। यह पूरे विश्व में आनुवंशिक रोगों की जांच-परख की सबसे बड़ी पहलों में से एक है। इस उपलब्धि में मध्यप्रदेश का महत्वपूर्ण योगदान है। प्रदेश में अब तक सवा करोड़ से भी अधिक लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी है। इनमें से अधिकांश लोगों को जेनेटिक काउंसलिंग कार्ड भी दिए जा चुके हैं। सिकल सेल से जुड़ी चुनौती को भारत सरकार ने बहुत ही गंभीरता से लिया और पिछले कुछ वर्षों में एक समग्र दृष्टि से सरकार ने जो प्रयास किए हैं, वे अत्यंत सराहनीय हैं। लगभग तीन वर्ष पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश के शहडोल से राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन को लॉन्च किया था। इस पहल के पीछे न केवल सरकार का गंभीर प्रयास का दृढ़ संकल्प था बल्कि इस चुनौती से जुड़े हर आयाम की समुचित प्रतिक्रिया देने की दूरदर्शी सोच भी थी।

*मिशन में अनेक स्तरों पर किए गए वैज्ञानिक और सामाजिक अध्ययन*
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि मुझे बताया गया है कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और केन्द्रीय जनजातीय मंत्रालय के संयुक्त मॉडल के रूप में देश में पहली बार ऐसा मिशन प्रारंभ किया। इसे केवल स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या के रूप में नहीं देखा गया। इसे जनजातीय स्वास्थ्य का मुद्दा, आनुवंशिकता से जुड़ी जागरूकता और प्रिवेंटिव हेल्थकेयर की चुनौती के साथ ही सामाजिक आचरण में बदलाव के मिशन के रूप में देखा गया। मुझे बताया गया है कि इस मिशन की पृष्ठभूमि में अनेक स्तरों पर किए गए वैज्ञानिक और सामाजिक अध्ययन रहे हैं। आईसीएमआर, ट्राइबल हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट, एम्स, एनएचएम, डब्ल्यूएचओ और विभिन्न राज्य सरकारों ने इस विषय के विभिन्न आयामों पर अध्ययन किए हैं। इनसे मुख्य रूप से यह आकलन सामने आया कि भारत में लगभग 2 से 2.5 करोड़ लोग सिकल सेल जीन के वाहक हो सकते हैं, लाखों लोग सक्रिय रोग से पीड़ित हैं, सबसे अधिक प्रभाव मध्य भारत की जनजातीय पट्टी में है, अनेक परिवार पीढ़ियों से इस रोग से प्रभावित थे लेकिन उन्हें बीमारी का नाम तक मालूम नहीं था। अध्ययनों से यह भी पता चला कि भारत के जनजातीय क्षेत्रों में सिकल सेल रोग का प्रसार सामान्य आबादी की तुलना में कई गुना अधिक है। फलस्वरूप, देश में पहली बार सार्वजनिक स्वास्थ्य, जनजातीय कल्याण, जेनेटिक साइंस और डिजिटल मॉनिटरिंग को एक साथ जोड़कर यह राष्ट्रव्यापी अभियान प्रारंभ किया गया। देश के 17 राज्यों में चलाये जा रहे इस अभियान के प्रति राज्यों ने भी पूरी तत्परता से भागीदारी की है।
