भूपेंद्र नायक, पिटोल संपूर्ण भारत देश के 19 राज्यों में निवासरत लबाना समाज के युवा संगठन लव सेना की पांचवी राष्ट्रीय बैठक का आयोजन रतलाम में किया गया। जिसमें चार राज्यों के करीब 250 युवा एवं वरिष्ठ जन शामिल हुए। इस दौरान समाज उत्थान एवं समाज में चल रही कुरीतियों को मिटाने तथा आज के युग में संस्कार शिक्षा स्वास्थ्य को बचाने के लिए का संकल्प लिया। पुरानी संस्कृति सामाजिक धरोहर बचाकर समाज में आर्थिक विकास और सामाजिक उत्थान पर भी बात हुई। बैठक में सामाजिक कार्य करने वाले समाज के युवाओं के साथ समाज की धरोहर वरिष्ठ लोगों ने भी अपने उद्बोधन से युवा लोगों को संबोधित किया। इस राष्ट्रीय बैठक में सर्वप्रथम वर्तमान परिवेश में मोबाइल से होने वाले नुकसान के बारे में बताया। मोबाइल की वजह से भाई-भाई से दूर है परिवार में सब एक दूसरे से दूर है और मोबाइल में आने वाले अश्लील वीडियो से समाज का पतन हो रहा है। इस पर पाबंदी लगाने के लिए समाज के युवा संगठन लव सेना के युवाओं द्वारा प्रत्येक गांव की इकाई के सदस्यों द्वारा लबाना समाज जनजागरण करने का संकल्प लिया तथा समाज में शिक्षित युवाओं द्वारा चाहे वह मेडिकल क्षेत्र हो इंजीनियरिंग क्षेत्र हो या प्रशासनिक पदों पर कार्य कर रहे लोगों द्वारा अपने गांव में पुरानी पीढ़ी के लोगों के साथ उनके अनुभवों के साथ आगे बढ़ाने के लिए समाज के सभी लोगों को विचार करना होगा। बैठक में विभिन्न प्रकार की कुरीतियों , को दूर करने का संकल्प लिया कि नशा और समाज में व्याप्त कुरीतियों को हर हाल में बदलेंगे। समाज को नशा मुक्ति, युवाओं को धार्मिक कार्य हेतु प्रेरित किया। नवीन कार्यकारिणी का घोषणा की गई बैठक में लव सेना लबाना समाज के युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण लबाना रावटी (रतलाम )द्वारा लवसेना लबाना समाज के राष्ट्रीय संरक्षक एवं बुजुर्ग लोगों की मार्गदर्शन टीम के साथ नए लोगों की टीम में प्रदेश अध्यक्ष जिला अध्यक्ष गांव इकाई के अध्यक्ष आदि सदस्यों की नवीन कार्यकारिणी की घोषणा की गई। यह राष्ट्रीय बैठक जलसरा होटल रतलाम मे संपन्न हुई, जिसमें दाहोद, झाबुआ, रतलाम,डूंगरपुर ,बांसवाड़ा ,प्रतापगढ़ , अहमदाबाद,आगर मालवा, बैतूल महाराष्ट्र के कार्यकर्ता उपस्थित हुए। Post navigation 40 दिन पूर्व भाजपा नेता और चांदी व्यापारी के यहां हुई चोरी की वारदात में आभूषण रखने वाले स्टील की ट्रे एक खेत की झाड़ियों में मिली बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के विरोध में पिटोल पूर्ण रूप से बंद रहा