मयंक विश्वकर्मा, आम्बुआ

 इन दिनों सभी और कोरोना की दूसरी लहर का तांडव जारी है ।यह संक्रमण शहरों से निकलकर ग्रामीण क्षेत्रों में भी अपना रौद्र रूप दिखाने लगा है ।प्रशासन की सख्ती इस और केवल घोषणाओं तथा कागजी आदेशों तक सीमित रह रही है। त्योहारों के मद्देनजर बाजारों में दिख रही भीड़ इस संक्रमण को और अधिक बढ़ाएगी यह तय माना जा रहा है तथा इस का असर भी दिखाई देने लगा है।

जैसा की सर्व विदित है कि कोरोना नाम की महामारी जो कि वर्ष 2020 में पूरे साल कहर ढाती रही 2021 के प्रारंभ में इसका असर कम जरूर नजर आया। मगर मार्च माह विगत वर्ष की तरह पुनः डरा रहा है कोरोना का संक्रमण जितनी तेजी के साथ पांव पसार रहा है उतनी तेजी विगत वर्ष भी नहीं देखी गई थी जिसका प्रमुख कारण अनलॉक को माना जा सकता है। शासन प्रशासन ने जो छूट दी उसका गलत फायदा उठाया जा रहा है। स्थिति यह है कि कोरोना गाइडलाइन के फरमान रोज जारी हो रहे हैं। मगर इन पर अमल नहीं हो रहा है। सार्वजनिक स्थलों, बैंकों ,सहकारी संस्थाओं, कियोस्क सेंटरों, धार्मिक स्थलों, अस्पतालों तथा बसों आदि वाहनों के साथ ही व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर मास्क सैनिटाइजर तथा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन बिल्कुल ही नहीं किया जा रहा है ।क्षेत्र में त्योहार का समय चल रहा है ।भगोरिया पर्व समाप्ति पर है तथा होली त्यौहार प्रारंभ हो रहा है। होली पर्व की खरीदारी हेतु आज तथा कल बाजारों में भारी भीड़ जुटेगी आज 27 मार्च को बाजार में खरीदारों की भारी भीड़ दुकानों पर जहां पर न तो व्यापारी और ना ही ग्राहकों ने कोरोना गाइडलाइन का पालन किया । बगैर मास्क तथा अन्य सुरक्षा साधनों के बिक्री खरीदी दिन भर चलती रही आम्बुआ में विगत दो-तीन दिनों से कोरोना पॉजिटिवो की संख्या में वृद्धि हुई है। इसके बावजूद न व्यापारी खोफ में है और ना ही ग्राहकों में डर दिखाई दे रहा है जो कि भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं कहे जा सकते हैं। प्रशासन को सख्त होना बहुत जरूरी है यदि नियमों को सख्ती के साथ पालन कराए तो ही अंकुश लग सकता है।

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