गराडू, झालोद (गुजरात) उनकी जीवन लीला भले ही समाप्त हो गई हो, लेकिन जो शब्द वे बोलकर गए, वे अमर बन गए और सदैव अमर रहेंगे। उन्होंने शब्दों को केवल बोला नहीं, बल्कि उन्हें अपने जीवन में उतारकर जीवित कर दिया। शब्द तो हर कोई बोलता है, लेकिन धरती पर ऐसे विरले व्यक्ति जन्म लेते हैं, जो शब्दों का सही अर्थ समाज तक पहुंचा जाते हैं। गराडू निवासी खेमचंद (जगदीश) कलाल अपने सरल जीवन और विशिष्ट विचारधारा के कारण पूरे गुजरात, बांसवाड़ा एवं आसपास के मध्य प्रदेश क्षेत्र में प्रसिद्ध रहे। स्वर्गीय जगदीश कलाल जी की पहचान केवल एक व्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि एक विचार के रूप में रही। उन्होंने अपने जीवन की शुरुआत से लेकर अंतिम समय तक एक ही पंक्ति को अपनाया—“भगवान करे ते भला माटे”। यह वाक्य उनके लिए केवल शब्द नहीं था, बल्कि जीवन जीने की सोच थी। वे हर शुभ कार्य और हर बातचीत की शुरुआत इसी पंक्ति के साथ करते थे। उनके पगड़ी रस्म के कार्यक्रम में भी यही पंक्ति लिखी गई, जो यह दर्शाती है कि विचार शरीर से बड़ा होता है। वे अपने पीछे भारापुरा परिवार छोड़ कर गए आज भी उनका चुना हुआ वाक्य “भगवान करे ते भला माटे” पूरे क्षेत्र में उनकी पहचान बनकर लोगों की जुबान पर है। विचार अमर होते हैं और जगदीश कलाल जी का विचार हमेशा जीवित रहेगा। Post navigation इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल से पीड़ितो को न्याय, दोषियों पर कार्यवाही के लिए कांग्रेस जनों ने उपवास कर जताया विरोध धुलेट में चोरों का आतंक, कालिका माता मंदिर में चोरी का प्रयास, ग्रामीणों में भय का माहौल