लडकी व दामाद से दहेज के रुपये मांगना एक पिता को पड़ा भारी…

नवनीत त्रिवेदी, हर्षवर्धन सिंह, लवेश स्वर्णकार@झाबुआ Live डेस्क

पुलिस अधीक्षक जिला झाबुआ अगम जैन के द्वारा जिले के समस्त थाना प्रभारियों को दहेज दापे के पैसो के लेनदेन के चलन को बंद करने हेतु सख्त कार्यवाही करने के निर्देश लगातार दिये जा रहे है। उक्त निर्देशों के तारतम्य में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री प्रेमलाल कुर्वे, एवं एसडीओपी पेटलावद श्री सौरभ तोमर के मार्गदर्शन में

जिला झाबुआ पुलिस टीम द्वारा कार्यवाही की जा रही है । उक्त निर्देश के परिपेक्ष्य में ऐसा ही एक मामला थाना रायपुरिया मैं आया  जिसमें थाना क्षेत्र के ग्राम रलियावन में नाहर सिंह पिता मोहन डामर निवासी पांच पीपला द्वारा दामाद व लडकी से दहेज दापे के रुप में रुपये की मांग की गई थी, रुपये नही देने पर लडकी के पिता के द्वारा फरियादीया व उसके पति को जान से मारने की धमकी दी, फरियादीया की सुचना पर थाना रायपुरिया पर अपराध क्रमांक 384/2023 धारा 384.506 भा.द.वि. का पंजीबध्द कर विवेचना में लिया गया ।

पूर्व में भी थाना राणापुर पुलिस द्वारा ग्राम पुवाला मैं लड़की द्वारा प्रेम विवाह करने के पश्चात लड़की के पिता रायमल पिता भटूरा भूरिया लड़की की मां रमतू पति रायमल भूरिया लड़की का भाई लक्ष्मण पिता रायमल भूरिया निवासी निवासी गण ग्राम पुवाला के द्वारा दामाद व लड़की से दहेज दापा के रूप में रुपए की मांग की गई थी फरियादी की सूचना पर थाना राणापुर पर अपराध क्रमांक 377/239.384.294.323. 506. 34 आईपीसी का पंजीबद्ध कर कार्यवाही की गई थी

थाना कोतवाली पर

फरियादया द्वारा आरोपियों 1.सुखराज s/o रिछू बिलवाल 2.राजन s/o रमलिया बिलवाल 3. मुन्ना s/o गबजिया 4. पप्पू s/o गवजिया 5. मंगलिया s/o गबजिया 6.ज्ञान सिंह s/o गबजिया के द्वारा लड़की के दहेज व दापे के रुपए मांगे गए थे थाना कोतवाली में अपराध क्रमांक 529 / 23 धारा 384.506.34 आईपीसी कायम कर आरोपियों के विरुद्ध कार्यवाही की गई थी

आदिवासी जिले झाबुआ में ग्रामीण क्षेत्रो में दहेज दापे का रिवाज है जिसमें वधु पक्ष के द्वारा वर पक्ष के परिजनो से पैसो का लेनदेन अधिक मात्रा में किया जाता है । जिससे की वर पक्ष के लोगो की आर्थिक स्थिति अत्यन्त दयनीय हो जा रही है यदि किसी परिवार में लडका लडकी की शादी करना हो तो 05-06 लाख रुपये और अन्य सामग्री में अत्यधिक खर्चा होता है, शादी होने के पश्चात लडका लडकी अपने परिवार सहित गुजरात मजदुरी करने के लिये चले जाते है जिसका कर्जा जीवनभर चलता रहता है, जन जागरुकता की कमी के कारण उक्त कुप्रथा मैं सुधार नही हो पा रहा है । इस कुप्रथा को बंद करने हेतु आदिवासी समाज में कुछ सुधार हेतु अपने परिवार के खिलाफ रिपोर्ट करने के मामले सामने आये है। अगर इस प्रकार के मामले भविष्य में फिर संज्ञान में आते है तो संबंधित के विरुध्द सख्त से सख्त कार्यवाही की जावेगी ।