कॉलेज में विश्व हिंदी दिवस पर हिंदी हुए आयोजन में प्रोफेसरों ने हिंदी के महत्व पर डाला प्रकाश

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रितेश गुप्ता, थांदला

हिन्दी हमारी मातृ एवं राजभाषा है, जिसे राष्ट्रभाषा बनाने के प्रयास किये जा रहे है। हिन्दी, हिन्दू, हिन्दुस्तान का नारा दिया जाता है, लेकिन वस्तु स्थिति इससे भिन्न है। व्यवहारिक रूप से हिन्दी का प्रयोग करने वालो की अपेक्षा एवं अवमानना का सामना करना पडता हैं। यह कारण है कि हमें हमारे देश में हिन्दी के संरक्षण एवं सवंर्धन हेतु हिन्दी दिवस व विश्व हिन्दी दिवस के आयोजनों की आवश्यकता पड़ती है। उक्त विचार महाविद्यालय में विश्व हिन्दी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में प्रभारी प्राचार्य डॉ.जीसी मेहता ने व्यक्त किए। कार्यक्रम के प्रारंभ में महाविद्यालय की छात्राओं चम्पा मुणिया एवं राधिका मावी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की, प्रो. सेलीन मावी ने हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार हेतु राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किये जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। प्रो. एसएस मुवेल ने हिन्दी भाषा के महत्व व उच्चारण की प्रक्रिया के संदर्भ में बताया कि अन्य भाषाओं की अपेझा हिन्दी की वर्णमाला के उच्चारण में चेहरे के सभी अंगो का संचालन एवं व्यायाम होता है। कार्यक्रम का संचालन कर रही नवागत हिन्दी की प्राध्यापक डॉ. रेखा नागर ने विश्व हिन्दी दिवस मनाने की पृष्ठभूमि को विस्तृत रूप से बताते हुए कहा कि विश्व 177 देशों में विश्व हिन्दी दिवस का आयोजन किया जा रहा है। विश्व के कई देशों में हिन्दी का द्वितीय भाषा के रूप के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा हिन्दी माध्यम से लिया जाना हिन्दी के बढ़ते महत्व को इंगित करता है। आभार व्यक्त करते हुए प्रो. मीना मावी ने हिन्दी के महत्व को सामाजिक दृष्टिकोण भाषा एक समृद्ध भाषा है, सामाजिक नातेदारी के प्रत्येक संबंध हेतु पृथक-पृथक शब्द होते है जबकि अंग्रेजी में सारी नातेदारियां अंकल और आंटी में सिमट कर रह गई है। प्रो. मनोहर सोलंकी, क्रीड़ा अधिकारी डॉ. शुभदा भौसले सहित बडी संख्या में विद्यार्थियों ने सहभागिता की।

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