कांग्रेस ने बनाई केबीसी, सांसद भूरिया पर लगाए परिवारवाद के आरोप

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रितेश गुप्ता, थांदला
विधानसभा चुनाव में दावेदारों को संतुष्ट करने में कांग्रेस भी नाकाम नजर आ रही है। कुछ दिनो से गुपचुप चल रही अंतर्रकलह आज खुलकर नजर आई जब ग्राम खजूरी में सारे असंतुष्ट कांग्रेसी कार्यकर्ता और दावेदारों ने मिलकर कांग्रेसी दावेदार के खिलाफ मोर्चा खेलते हुए कांग्रेस बचाओ कमेटी का गठन कर दिया और 9 तारीख को निर्दलीय चुनाव लडऩे की घोषणा भी कर दी। भाजपा की तरह कांग्रेस पार्टी के असंतुष्टों ने भी ग्राम खजूरी में बैठक कर अपनी रणनीति बनाई। बैठक के दौरान नाराज कांग्रेसियों ने कहा पन्द्रह वर्ष से भाजपा सता में है और मध्यप्रदेश से कांग्रेस का सफाया हो चुका है लेकिन प्रदेश स्तर से फैली गुटबाजी स्थानीय स्तर के कांग्रेसी कार्यकर्ताओ का मनोबल गिराया है जिससे कांग्रेस का नारा वक्त है बदलाव का कैसे सार्थक होगा। कांग्रेस पार्टी के असंतुष्ट दावेदार जसवंतसिह भाबर, चेनसिंह डामर, डॉ. मारकुस डामर व राजेश गेंदाल डामोर ने अपने समर्थको के साथ बैठक कर नाम निर्देशन के अंतिम दिन सामूहिक रूप से पार्टी की ओर से नामांकन दाखिल करने का निर्णय लिया। जिसमे पार्टी के बैनर तले नामांकन भरे जावेगे यदि पार्टी अपना निर्णय बदलती है तो ठीक अन्यथा सभी के निर्णय से कोई भी एक प्रत्याशी निर्दलीय रूप से चुनाव मैदान मे उतरेगा। सभी दावेदारों ने एक स्वर में क्षैत्रीय सांसद के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया। युवा नेता जसंवतसिंह भाबर ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमारी मां के समान है मेरे बाप-दादा ने पार्टी को अपने खून पसीने से सींचा है मेरी रग-रग में कांग्रेस बसी है लेकिन क्षेत्रीय सांसद अपने स्वार्थ के चलते पार्टी और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की बलि चढा रहे हैं। नगर परिषद के चुनाव में पार्टी को नुकसान पहुंचाने वालो को पार्टी में पदो से नवाजा जा रहा है। सांसद भूरिया ने जिले मे पार्टी की आत्मा को खत्म कर दिया है। इसलिये हम-सब मिलकर कांग्रेस की आत्मा को जीवित रखने का प्रयास कर रहे है । जनपद सदस्य चेनसिंह डामोर ने कहा कि छात्र जीवन से राजनीति कर रहा हूं पार्टी के विभिन्न पदों पर रहा हूं कई चुनाव लड़े और जीता हंू लेकिन सांसद को चापलूसी करने वाले लोग ज्यादा पसंद है। दिलीपसिंह भूरिया के कांग्रेस छोडऩे के बाद भी हमने कांग्रेस नहीं छोडी लेकिन पार्टी मे आज भी हम लोगों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया जा रहा है। डॉ मार्कोस डामोर ने कहा कि सांसद क्षेत्र को अपने परिवार तक ही सीमित रखना चाहते है। उन्होंने थांदला विधानसभा से ऐसे व्यक्ति को प्रत्याशी बनाया है जिसने ईसाई समाज के धर्मप्रचारक को उसकी पत्नी सहित अपने घर पर बंदी बनाकर मारपीट की थी जिससे पूरा ईसाई समाज इनसे नाराज है जिसका खामियाजा चुनाव मे कांग्रेस को उठाना पड सकता है। ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष गेंदाल डामारे भी कांग्रेस प्रत्याशी के नामांकन पूर्व सांसद भूरिया के खिलाफ सार्वजनिक रूप अपनी नाराजगी व्यक्त कर चुके है। एनएसयूआई के सुनील चरपोटा ने कहा कि हमें क्षेत्र से युवा व पढ़ा-लिखा विधायक चाहिए, जो क्षेत्र की आवाज सरकार तक पहुचा सके युवाओ के लिये रोजगार पैदा करने के साधन जुटा सके आतजन की लड़ाई ताकत से लड़ सके लेकिन कांग्रेस पार्टी के निर्णय ने हमे निराश कर दिया। दोनों ही दलों की अंतरकलह अब खुल कर सामने आ चुकी है। थांदला क्षेत्र के समस्त कांग्रेस कार्यकर्ता थांदला क्षैत्र से ही किसी को भी पार्टी प्रत्याशी बनाये जाने के पक्ष मे थे लेकिन सांसद की हठधर्मिता के चलते मेघनगर क्षेत्र के व्यक्ति को प्रत्याशी बनाया गया। बैठक में उपस्थित कार्यकर्ता ने सभी दावेदारों को एकसाथ नामांकन दाखिल करने लिये सहमति दी और नामांकन रैली मे अधिक से अधिक लोगों को सम्मिलित करने की जवाबदारी भी ली। दोनों ही प्रमुख दलो ने पार्टी लाइन को धता बताते हुए टिकट वितरण किया जिस वजह से दोनो ही दलों में असंतोष का लावा पनप रहा है। परिणाम तो भविष्य के गर्त मे है लेकिन पार्टियों की बगावत ने चुनाव को रोचक जरूर बना दिया है।