मेघनगर : हिंदू सम्मेलन में उमड़ा जनसैलाब, सामाजिक समरसता और एकजुटता का दिया संदेश

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लोहित झामर, मेघनगर

स्थानीय दशहरा मैदान पर रविवार को विशाल हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की 100 साल की यात्रा और समाज में समरसता के भाव को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित इस सम्मेलन में सभी जातियों, पंथों और मान्यताओं के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सम्मेलन के प्रति उत्साह का आलम यह था कि नगर के व्यापारियों ने दोपहर तक अपने प्रतिष्ठान स्वतः स्फूर्त बंद रखे।

केसरियामय हुआ नगर, पुष्प वर्षा से स्वागत

सम्मेलन का शुभारंभ श्री विश्वकर्मा मंदिर से निकली भव्य कलश एवं शोभायात्रा के साथ हुआ। भगवा ध्वज की अगुवाई में निकली इस यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं सिर पर मंगल कलश धारण कर शामिल हुईं। यात्रा का नेतृत्व संत श्री रघुवीर दासजी महाराज और नगर के महंत श्री बद्रीदासजी महाराज ने किया। ‘जात-पात की करो विदाई, हिंदू-हिंदू भाई-भाई’ के नारों से पूरा नगर गुंजायमान हो गया। रामदल अखाड़े, झाबुआ नाका, शिवाजी चौक और आजाद चौक सहित मार्ग में जगह-जगह पुष्प वर्षा कर यात्रा का भव्य स्वागत किया गया।

गौ सेवा और धर्म रक्षा का आह्वान

मुख्य अतिथि संत श्री रघुवीर दासजी महाराज (राजस्थान) ने अपने संबोधन में कहा कि संघ के 100 वर्ष पूर्ण होना हर्ष का विषय है। उन्होंने गौ रक्षा पर जोर देते हुए कहा, “गौ माता की रक्षा से ही धर्म बचेगा। संजेली के जंगल में हुई गौ-हत्या की घटना ने जिले को कलंकित किया है। उस भूमि पर विशाल गौ-अभयारण्य विकसित करना ही इस कलंक को धोने का मार्ग है।” उन्होंने हिंदुओं से अपनी पहचान बनाए रखने के लिए तिलक लगाने का भी आग्रह किया।

संघ की शक्ति और राष्ट्र निर्माण

मुख्य वक्ता दिनेश गुप्ता ने संघ की विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 1925 में रोपा गया पौधा आज विशाल वटवृक्ष बन चुका है। उन्होंने कहा, “हिंदू समाज की एकजुटता के पीछे संघ का संघर्ष और बलिदान है। वनांचल क्षेत्र में अवैध धर्मांतरण एक गंभीर समस्या है, जिसे समाज को मिलकर रोकना होगा।” कार्यक्रम के दौरान रक्षिता सोनी ने उपस्थित जनसमूह को ‘पंच परिवर्तन’ को आत्मसात करने का संकल्प दिलाया।

सामूहिक भोज: मिट गई ऊंच-नीच की दीवार

सम्मेलन का सबसे प्रभावी पक्ष ‘समरसता भोज’ रहा। कार्यक्रम के समापन पर हजारों की संख्या में हिंदू समाज के लोगों ने बिना किसी भेदभाव, जाति या ऊंच-नीच के विचार के, एक ही पंगत में बैठकर सामूहिक भोज किया। कार्यक्रम का प्रारंभ डॉ. शैलेक्षी वर्मा के गणेश भजन और सरस्वती शिशु मंदिर के विद्यार्थियों के सांस्कृतिक नृत्य से हुआ। अंत में भारत माता की आरती के साथ सम्मेलन संपन्न हुआ।

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