अवैध शराब व्यवसाय चरम पर है, जिम्मेदार आबकारी-पुलिस विभाग कार्रवाई से करते गुरेज

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भूपेंद्र बरमंडलिया, मेघनगर
झाबुआ जिले में अवैध शराब विक्रय ओर परिवहन का कारोबार इन दिनों चरम पर है। एक ओर शादी ब्याह की सीजन शुरू हुई। वही दूसरी ओर भगोरिया पर्व की शुरुआत है ऐसे में आदिवासी बाहुल्य झाबुआ जिले में इन दिनों शराब की खपत ओर ज्यादा बढ़ जाती है ऐसे में ठेकेदारों द्वारा अवैध शराब का परिवहन का कार्य खुलेआम किया जा रहा है। ऐसा नहीं की इसकी खबर आबकारी विभाग व पुलिस महकमे को नही, सब कुछ पता होने के बावजूद मात्र छोटी मछली को निशाना बनाकर कार्रवाई की जाती है किन्तु अवैध शराब परिवहन को लेकर न तो आबकारी विभाग सजग है और नहीं पुलिस महकम अगर बात ग्रामीण इलाको की करे तो दर्जनों अवैध शराब की दुकान इन इलाकों में चल रही है। मगर हर बार जिम्मेदार आबकारी विभाग इक्का-दुक्का कार्रवाई कार्य की इतिश्री कर लेता है। आखिर क्या वजह है कि आबकारी विभाग के जिम्मेदार बड़ी कार्रवाई करने से गुरेज करता है। बात अगर मेघनगर की करे तो एकमात्र शराब की लाइसेंसधारी दुकान है। मगर यहां से भी खुलेआम शराब का परिवहन होता है जबकि ठेकेदार का ठेका सिर्फ दुकान से शराब विक्रय करने का हुआ है न कि शराब परिवहन का मगर जिम्मेदार अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी मौन है। कुछ दिन पूर्व पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर झाबुआ क्राइम ब्रांच टीम द्वारा मेघनगर के रंभापुर चौकी के अन्तर्गत ग्राम बिसलपुर मे एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देकर लाखों की अवैध शराब का जखीरा एक मकान में पकड़ा था तथा आरोपी को गिरफ्तार किया गया था जो कि संभवत पड़ोसी राज्य गुजरात मे भेजने के लिए वहां एकत्रित की गई थी इतनी मात्रा में अवैध शराब कैसे परिवहन द्वारा वहां जमा की गई यह भी एक बड़ा सवाल है ऐसे में खुले आम शराब का परिवहन और आबकारी विभाग द्वारा कार्रवाई न करना कई सवाल खड़े कर रहा है। मेघनगर क्षेत्र के दर्जनों गांवों में लाइसेंसी शराब ठेकेदार के माध्यम से ही अवैध शराब बिक्री का गोरखधंधा फल-फूल रहा है लंबे समय से गांव-गांव में शराब की अवैध बिक्री की जा रही है। शराब ठेकेदार द्वारा खुद के वाहनों से खुलेआम गांव-गांव दुकानें खुलवाकर अंग्रेजी एवं देसी शराब बेची जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह कारोबार इतने संगठित तरीके से संचालित हो रहा है कि अवैध रूप से शराब बेचने वालों को ठेकेदारों ने डायरी बनाकर दी है। जिनके पास ये डायरियां हैं पुलिस उन पर कार्रवाई नहीं करती है।ॉॉॉ असलियत में नियम यह है कि आबकारी विभाग द्वारा तय दुकानों से ही शराब की बिक्री की जा सकती है जो डायरी को लाइसेंस मान रहे हैं असल में वो अवैध शराब बेच रहे हैं।

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