झाबुआ। Live डेस्क
जिले में शिक्षको के स्थानांतरण के बाद भी उनके कव्र्तव्य स्थल पर ज्वाईन होने के तीन माह बाद भी वेतन का भुगतान नही होने को लेकर शिक्षक विशेषकर जिन्होने स्वैच्छिक स्थानांतरण करवाया वे आर्थिक रूप से परेशान हो रहे है। उसी परेशानी को लेकर शनिवार को शासकीय बुनियादी प्राथमिक शाला अंग्रेजी माध्यम झाबुआ की शिक्षिका श्रीमती सोनिया बारिया प्राथमिक शिक्षक ने शनिवार को जिला कलेक्टर एवं सहायक आयुक्त आदिवासी विकास को आवेदन देकर उन्हे हो रही परेशानियो के बारे में अनुरोध पत्र प्रस्तुत किया। जिस पर से उनके द्वारा बताया गया कि स्थानांतरण हुये विगत तीन माह हो चुके है। पूर्व की संस्था से कार्य मुक्ति का आदेश भी हो चुका है। लेकिन तीन से वर्तमान पदस्थ संस्था बुनियादी स्कुूल अंग्रेजी माध्यम में आज दिनांक तक ज्वाईनिंग नही हो पाई है ओर ना ही वेतन का भुगतान हो पाया है। ऐसे में उच्च अधिकारियो को जब इस बात से अवगत कराया गया तो उनके माध्यम से पता चला कि प्राथमिक शिक्षक के तो आॅनलाईन पर पद ही रिक्त नही है। ऐसे में स्थानांतरण हुई शिक्षिका ना ही पूर्ववृत संस्था मेघनगर ब्लाॅक में है ओर ना ही वर्तमान में झाबुआ ब्लाॅक में। आखिर वेतन का भुगतान किस संस्था से हो। यह अपने आप में एक बडा सवाल खडा होता है कि यदि प्रशासन के पास रिक्त पद नही थे तो स्थानांतरण की प्रक्रिया ही क्यो की। ओर जब स्थानांतरण किया तो पदो की व्यवस्था क्यो नही करवाई जा रही है। ऐसे में शिक्षिक श्रीमती सोनिया बारिया द्वारा मांनसिक रूप से परेशान हो रही है। वही उनके द्वारा बताया गया कि बैंक से लोन भी लिया गया है जिसकी लोन की किश्त 6 हजार रूपये महिना आती है।विगत तीन माह से बैंक लोन की किश्त भी बकाया चल रही है जिस पर से लेट फिस के तोर पर एक हजार रूपये अतिरिक्त शुल्क भी लगेगा। वही घर को चलाने मे भी काफी परेशानी का सामना करना पड रहा है।
स्थानांतरण नीति के अन्तर्गत कमलनाथ सरकार ने शिक्षक एवं शिक्षिकाओ को स्वैच्छिक स्थानांतरण के लिये आवेदन चाहे थे ओर जिले के प्रभारी मंत्री सुरेन्द्रसिह बघेल की अनुशंसा पर विगत दिनो ढेरो स्थानांतरण जिले के अंदर ही हुये है। नियमो के अनुसार स्वैच्छिक स्थानांतरण या आपसी स्थानांतरण पद की रिक्तता होने के बाद ही या फिर प्रशासनिक आधार पर स्थानंातरण से रिक्त हुये पदो पर आमतौर पर किये जाते है। ओर इसका पुरा रिकार्ड भी सहायक आयुक्त कार्यालय के पास उपलब्ध रहता है। किन्तु अब यह सवाल खडा किया जा रहा है कि इनके जो स्थानांतरण किये है वह स्थान पर पद रिक्त नही है। ऐसे में दुबले को दो आसाड वाली परिस्थिति से यह शिक्षकगण चक्कर लगाने को मजबुर हो रहे है। जिस संस्था में कार्यरत थे वहा से उनका वेतन इसलिये नही निकलेगा क्योकि वे वहा से कार्यमुक्त हो चुके है तथा उनका अंतिम वेतन प्रमाण पत्र भी स्थानांतरित संस्था पर भेज दिया गया है। किन्तु इन जगहो पर ज्वाईन होने के बाद भी पिछले तीन माह से शिक्षिका को इसलिये वेतन नही मिल रहा है क्योकि अब बताया जा रहा है कि यहा पर पद ही रिक्त नही है।
अब सवाल उठता है कि जब पद ही रिक्त नही थे तो फिर इस स्थान पर स्वैच्छित स्थानांतरण किस कारण हुआ। आज इस शिक्षिका के सर पर तलवार टंगी हुई है। बरसो के बाद पारिवारिक समस्या को देखते हुये इनके स्थानांतरण आदेश तो जारी हुये ओर कार्यमुक्त होकर ज्वाईन हुये तीन माह से अधिक समय हो गया उसके बाद अब यह कहा जा रहा है कि यहा से वेतन निकलना संभव नही है। जाहिर तोर पर इसके लिये सहायक आयुक्त आदिवासी विकास ही जिम्मेवार है।
वैसे सुत्रो से मिली जानकारी के अनुसार पद तो ढेरो रिक्त पडे है किन्तु आॅनलाईन में आईएफएमआईएस साॅफटवेयर अपडेट नही होने से इन पदो को रिक्त नही बताये जाने के कारण इस प्रकार की दुविधा पैदा हो रही है। जो शिक्षको के लिये परेशानी का सबब बन चुकी है। अब इन 18 शिक्षको को यह समझ नही आ रहा है कि वे आखिर स्थानांतरण हुये भी है या नही। क्योकि पूर्ववतृ संस्था से तो इन 18 शिक्षको को कार्यमुक्त कर दिया है जिससे की अब वहा से भी इनका वेतन भुगतान नही हो सकता है। रही बात वर्तमान पदस्थापना की वहां पर सर्वप्रथम इन 18 शिक्षको की ज्वाईनिंग ही नही हो पाई है जिससे की इन शिक्षको के वेतन का भुगतान हो सके।
क्या कहना है जिम्मेवारो का-
जिले भर में संभाग, विकासखंड आदि जगहो से शिक्षको के स्थानंातरण हुये है। हमारे द्वारा जिले भर में जितने पद रिक्त थे हमने जिले के स्थानांतरण किये है। लेकिन ंसंभाग लेवल के भी शिक्षको का स्थानांतरण झाबुआ जिले में हुआ। पदो की व्यवस्था के लिये भोपाल आयुक्त को लिखित में सुचना देकर जल्द ही इस समस्या का निराकरण किया जायेगा। रही बात वेतन की उसे दो या तीन दिवस में ही निराकृत कर दिया जायेगा।
प्रशांत आर्या , सहायक आयुक्त आदिवासी विकास झाबुआ।
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