संत शिरोमणि गंगाराम जी महाराज का आह्वान ‘सनातन ही आदिवासियों का मूल धर्म, कुरीतियों को त्यागें’

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भूपेंद्र नायक, पिटोल

मांडली रोड स्थित रामेश्वर महादेव मंदिर के पांचवें पाटोत्सव के अवसर पर पिटोल नगर सहित आसपास के क्षेत्र के भगत समाज और सर्व समाज द्वारा भव्य धार्मिक आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में गुजरात के देहदा से पधारे आदिवासी संत शिरोमणि गंगाराम जी महाराज के सत्संग का लाभ लेने के लिए झाबुआ जिले के अनेक गांवों से बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु पहुंचे।

सत्संग से पूर्व रामेश्वर महादेव मंदिर में आरती कर महाराज श्री का स्वागत किया गया। इसके पश्चात सत्संग पंडाल में भगत समाज के लोगों द्वारा महाराज श्री का शाल और श्रीफल से भावभीना स्वागत कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।

सनातन धर्म ही आदिवासियों का मूल धर्म: महाराज श्री

सत्संग के दौरान महाराज जी ने कहा कि हिंदू सनातन धर्म ही आदिवासियों का मूल धर्म है। भगवान शिव के मंत्र ‘ओम नमः शिवाय’ के जाप से सभी पापों का निवारण होता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि मनुष्य जन्म एक बार मिलता है, इसलिए इंसान को सत्कर्म करते हुए भगवान का भजन करना चाहिए और दान-पुण्य कर अपना जीवन सफल बनाना चाहिए।

महाराज जी ने समाज में आए बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय था जब आदिवासियों के पास बुनियादी सुविधाओं का अभाव था, लेकिन आज परिस्थितियाँ बदल चुकी हैं। आज आदिवासी समाज आर्थिक और सामाजिक रूप से संपन्न हो रहा है और शिक्षित युवा आगे बढ़कर उन्नति कर रहे हैं। समाज अब जातिगत भेदभाव भूलकर कंधे से कंधा मिलाकर चल रहा है। उन्होंने आह्वान किया कि हमें अपने पूर्वजों की संस्कृति को बचाने के लिए धर्म को नहीं छोड़ना चाहिए और गो-हत्या जैसी कुरीतियों को रोकने के लिए आगे आना चाहिए। साथ ही, उन्होंने नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने और उन्हें मंदिर व देव पूजा की परंपरा सिखाने पर जोर दिया।

धर्मांतरण रोकने, गौ-हत्या और दहेज-दापा बंद करने का आह्वान

महाराज श्री के साथ पधारे अनुयायियों ने वर्तमान में बढ़ रहे धर्मांतरण पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आदिवासी इस देश के मूल निवासी हैं और वर्षों से अपने देवी-देवताओं को पूजते आए हैं। कुछ लोग लालच में आकर धर्म परिवर्तन कर रहे हैं और गो-हत्या जैसे कार्यों में संलिप्त हो रहे हैं, जिसे हर हाल में कानून की मदद से रोकना होगा।

सामाजिक कार्यकर्ता श्यामा भाई ताहेड ने भी समाज को संबोधित करते हुए कुप्रथाओं पर प्रहार किया। उन्होंने कहा कि समाज प्रगति तो कर रहा है, लेकिन दहेज-दापा जैसी प्रथाओं के कारण हम मानसिक रूप से पीछे रहे हैं। लाखों रुपये का दहेज लेने के कारण बेटियाँ और परिवार कर्ज के बोझ तले दब जाते हैं, जिसे चुकाने के लिए उन्हें कठिन परिश्रम करना पड़ता है। यह एक तरह से अपनी ही बेटी का शोषण करने जैसा है। उन्होंने धर्मांतरण रोकने के लिए गांव के तड़वी (परंपरागत मुखिया) और सरपंचों को आगे आने की अपील की, ताकि भोले-भाले आदिवासियों को भ्रमित होने से बचाया जा सके और जो भटक गए हैं, उन्हें पुनः मूल धर्म में लाया जा सके।

सात हजार श्रद्धालुओं ने ग्रहण की प्रसादी

सत्संग के पश्चात रामेश्वर महादेव मंदिर समिति द्वारा विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जो देर रात 8 बजे तक चला। इस महाभंडारे में लगभग सात हजार श्रद्धालुओं ने भोजन प्रसादी ग्रहण कर धर्म लाभ लिया।

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