झाबुआ जिले की प्रशाशनिक हलचल ; अंधेर नगरी चोपट राजा

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1981

प्रशाशनिक हलचल——–

चंद्रभान सिंह भदौरिया@ चीफ एडिटर

देविका कब तक लगवाओगी सरकारी खजाने को चुना ?
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झाबुआ की माइनिंग अफसर देविका परमार को पता नहीं किसका खजाना भरने की चिंता है।मैडम झाबुआ शहर के सरकारी हल्का नंबर 5 ; 6 & 9 की खुदाई अपनी आंखों से कई बार देख चुकी है। निजी जमीन भी कई क्यूबिक मीटर काटी गयी। मगर देविका है कि उन्हे कुछ दिखाई नहीं देता .. अभी तक एक पखवाडा गुजरने के बाद भी वह एक रुपये भी बतोर रायल्टी पेनाल्टी सरकारी खजाने के लिए नहीं वसूल पाई ; वसूलेगी कैसै उन्हे कुछ गलत नहीं लगता । लेकिन बडा सवाल यह भी है कि ऊपर के जिम्मेदार अधिकारियों को भी यह सब क्यो दिखाई नहीं देता ?

 

लावारिस सा हुआ सहायक आयुक्त कार्यालय !
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एक जमाना था जब झाबुआ का सहायक आयुक्त आदिवासी विकास का कार्यालय गुलजार रहा करता था। मगर वक्त के साथ निजाम बदलता गया .. अब सहायक आयुक्त गणेश भाबर इंदोर संभाग के उपायुक्त के प्रभारी में क्या आये तब से पूरे दफ्तर मे सन्नाटा पसरा हुआ ने। वाले बताते है कि कलेक्टर आशीष सक्सेना ओर गणेश भाबर का तालमेल भी ठीक नहीं है इसलिए बहुतों को नुकसान हो रहा है आप समझ रहे है ना कैसा नुकसान ? ना समझे तो व्यक्तिगत पूछ लीजिएगा ।

 

टाय टाय फिस्स हुआ प्रशासन का दहेज दापा
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झाबुआ जिला प्रशासन ने बीते साल ईमानदारी से प्रयास किये थे कि दहेज दापा नियंत्रित किया जाये । पिछले साल तक तो ठीक ठीक चला मगर इस साल लगभग 80% लोगों ने दहेज दापा अभियान को ठेंगा बता दिया । अब खुलकर डीजे बज रहे है जमकर शराब चल रही है ओर दहेज दापा फिर अपने पुराने रेट पर आता दिख रहा है इसके बावजूद प्रशाशन अपनी पीठ थपथपाऐ तो हम तो इतना ही कहेंगे कि ” खुश होने के लिए ख्याल अच्छा है साहब” ?

 

आप ” IAS ” एसडीएम हो साहब ; दिखाईये तो सही
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झाबुआ जिले के पेटलावद सब डिविजन के एसडीएम भारतीय प्रशाशनिक सेवा के नये अधिकारी है आये थे तो जलवे ऐसे दिखाए कि लगा था कि बंदा कुछ करेगा कुछ किया भी लेकिन कई मुद्दो पर उनकी मुखरता तो कई मुद्दो पर उनकी कारवाई की गति समझ नहीं आई । शराब दुकान को लेकर उनकी सीलबंदी की तो किरकिरी हो चुकी है लेकिन पेटलावद के एक सरकारी डाक्टर द्वारा मरीज को डिस्चार्ज करने के लिए रिश्वत मामले मे कारवाई को लेकर उन्होंने उतना उत्साह नहीं दिखाया जितना शराब दुकान को लेकर दिखाया था माना कि कारवाई कमिश्नर को करना है लेकिन साहब रिपोर्ट ही जल्दी दे दो ताकी सेहत जैसै महकमे मे भ्रष्टाचार को लेकर प्रशाशन की ओर से सकारात्मक संदेश जाये कि आम आदमी के साथ प्रशासन खडा है ।