झाबुआ। एक कलाकार को सकारात्मक सोच के साथ ही कला के प्रति समर्पण भावना से कार्य करना चाहिए। सकारात्मक सोच के साथ एक कलाकार को जीवन में कई उतार चढाव का सामना भी करना पडता है । फिल्मी दुनिया में किसी भी कलाकार को अपना स्थान बनाने के लिये अपनी प्रतिभा के साथ ई्रमानदारी से निर्वाह करना पडता है। उक्त बात बुधवार को स्थानीय मीडिया से मुखातिब होते हुए फिल्म अदाकारा एवं आने वाली ुिल्म षहर मसीहा नही की नायिका त्रिशा खान ने कही। फिल्म के हिरो एवं निर्माता राजन कुमार के साथ झाबुआ मे आयोजित नवरात्री के चल समारोह मे शिकरत करने आई फिल्म अदाकारा त्रिषाखान एवं राजनकुमार ने मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि उनके द्वारा अभिनित एवं निर्मित फिल्म षहर मसीहा नही आगामी नवम्बर माह में रिलिज हो रही है। फिल्म की थीम बताते हुए अभिनेता राजन कुमार ने कहा कि अच्छे इंसान बनने के लिये षहर की ओर जापना कतई आवष्यक नही है । फिल्म की कहानी सामाजिक परिवेश पर आधारित होकर इसमें पानी बचाने का सन्देश, नशा मुक्ति पर सन्देश, बाल श्रमिक समस्या एवं जातिवाद को लेकर प्रहार किया गया है। फिल्म कलाकार राजन एवं त्रिशाखान के अनुसार व्यक्ति महलों या शहरों मे रह कर अपने सपने पूरे करने का ख्वाब देखता है, किन्तु गा्रमों में रह कर भी व्यक्ति अपनी मेहनत से इस सपनें को पूरा कर सकता है। खान के अनुसार फिल्म में एक गा्रमीण परिवेष का लडका अपने गमों को लेकर शहर आता है किन्तु षहर में भी उसे अपने गमों से भी अधिक गम मिलते है और एक एक करके वह उन समस्याओं से लोहा लेता है। राजनकुमार ने बताया कि उनकी फिल्म अमरेन्द्र भारती के उपन्यास शहर मसीहा नही पर आधारित बेहद ही मनोरंजक एवं शिक्षाप्रद फिल्म है। दिल्ली के विभिन्न स्थानों पर इसकों फिल्माया गया। इस फिल्म में फिल्म का नायक गांव से आता है और उसको एक शहरी लडकी से प्रेम होता है, किन्तु परिवार इनके मिलन में बाधक बनता है अन्ततः अपनी मेहनत के बल पर वह अपने लक्ष्य मे सफल होता है ।
राजन कुमार ने बताया कि वे मूलतः थियेटरकर्मी है और एक फिल्म निर्माण में 10 बेटियों के विवाह इतना व्यय हो जाता है । उनकी इस फिल्म में 80 से 85 कलाकारों ने काम किया है ।झाबुआ के सन्दर्भ में उनका कहना था कि चल समारोह में उन्हे लघु भारत का साक्षात्कार हुआ हे और नायिका त्रिषाखान भी झाबुआ से काफी प्रभावित हुई है । अपनी फिल्म के प्रमोशन के लिये आये राजनकुमार ने कहा कि सभी का सपोर्ट इस फिल्म की सफलता के लिये जरूरी है ।
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- आखिर इस बार गणतंत्र दिवस का रंग क्यों दिखा फीका..? मंच से गायब रहे पंच, निजी स्कूल की बेरुखी — बना चर्चा का विषय..? अर्पित चोपड़ा, खवासा जहाँ पूरा देश 26 जनवरी को गर्व और उल्लास के साथ गणतंत्र दिवस मनाता है वहीं झाबुआ जिले के खवासा गांव में इस बार यह राष्ट्रीय पर्व कुछ फीका-सा नजर आया। गांव में आयोजित कार्यक्रमों को लेकर कई चर्चाओं का दौर चलता रहा। गणतंत्र दिवस के अवसर पर नगर में प्रभात फेरी निकाली गई, जो नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई ग्राम पंचायत भवन पहुँची। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से हर बार की तरह इस बार भी प्रभात फेरी से लेकर मंच तक कई पंचों की अनुपस्थिति साफ नजर आई। जनप्रतिनिधियों की यह गैर मौजूदगी ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बनी रही। एक निजी स्कूल की प्रभातफेरी को लेकर बेरुखी खासी चर्चा का विषय बनी रही। आमतौर पर इस देशभक्ति पर्व को लेकर बच्चों में खासा उत्साह रहता है, लेकिन इस बार स्कूल के बच्चे मुख्य कार्यक्रम से दूर नजर आए। उक्त निजी स्कूल का स्टॉफ कुछ बच्चों को लेकर सीधा कार्यक्रम में पहुंचा और मंच पर बच्चों की प्रस्तुति करवाकर इतिश्री करता दिखाई दिया। प्रतिवर्ष एबीवीपी द्वारा झंडा वंदन किया जाता है लेकिन इस बार अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा झंडा वंदन कार्यक्रम भी आयोजित नहीं किया गया। यह भी नगरवासियों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। प्रभात फेरी के पश्चात ग्राम पंचायत भवन में सरपंच गंगाबाई खराड़ी द्वारा ध्वज फहराया गया। इसके बाद राष्ट्रगान हुआ और ध्वज को सलामी दी गई। आगे का कार्यक्रम कन्या स्कूल परिसर में आयोजित किया गया, जहाँ मंच पर भी कई पंचों की उपस्थिति नहीं दिखी। कार्यक्रम में विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों ने देशभक्ति गाने पर एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दी। कार्यक्रम के पश्चात ग्राम पंचायत द्वारा मिठाई वितरण किया गया। राष्ट्रीय पर्व के इस मुख्य कार्यक्रम को लेकर पंचायत द्वारा अच्छी व्यवस्था की गई। कुल मिलाकर, खवासा में इस बार गणतंत्र दिवस का उत्साह कहीं न कहीं कम नजर आया। पंचों की गैर हाजरी, परंपरागत प्रभात फेरी को लेकर स्कूल की बेरुखी लोगों को खटकती रही। ग्रामीणों का कहना है कि राष्ट्रीय पर्व जैसे अवसरों पर सभी को एकजुट होकर भाग लेना चाहिए, ताकि बच्चों और युवाओं में देशभक्ति की भावना और मजबूत हो सके।
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