झाबुआ लाइव के लिए पेटलावद से हरीश राठौड़ की रिपोर्ट-
प्रदेश सरकार के लाख दावों के बीच भी स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत ग्रामीण स्तरों पर बेहाल है। पेटलावद के समीप स्थित ग्राम बेकल्दा में पिछले कई महीनों से बिजली बिल नहीं भरने के बाद एमपीइबी के कर्मचारियों ने लाइट काट दी, जिससे स्वास्थ्य केंद्र अंधेरे में है, यहां पर मरीजों का इलाज ड्रेसर के भरोसे चल रहा है और डॉक्टरों इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में महीनों से नहीं आए और ड्रेसर भी झाबुआ से अप-डाउन करता है और मरीज परेशान होकर अगर किसी को सूचना देता है तो यहां बीएमओ और स्वास्थ्य कर्मचारी मरीज को धौंस-दपट देते हैं। ऐसे में मरीज परेशान होकर कहां जाए, जबकि पेटलावद स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेकल्दा से 30 किमी की दूरी पर स्थित है तो मरीजों की परेशानी आसानी से समझी जा सकती है। ऐसा ही एक मामला बेकल्दा स्वास्थ्य केंद्र में आया जब एक गर्भवती महिला मानाबाई पति पूनमचंद अपनी डिलेवरी के लिए बेकल्दा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची, तो यहां पर लाइट नहीं थी और उसने अंधेरे में ही एक बालक को जन्म दिया। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है स्वास्थ्य सेवाओं पर करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद भी ग्रामीण स्तर पर मरीजों से सुविधाओं कितनी दूर है और जिम्मेदार स्वास्थ्य अमला है कि कान में रुई डालकर सो रहा है।