-देवास में वन विभाग द्वारा रिकार्ड इसी बाघ की तस्वीर

झाबुआ लाइव डेस्क के लिए हरीश राठौड़/ लोकेंद्र चाणोदिया/अर्पित चोपड़ा की रिपोर्ट-
झाबुआ जिले की पेटलावद तहसील के कसारबरडी गांव में बीते 40 घंटों से टाइगर अभी मौजूद है। वन विभाग के डीएफओ राजेश खरे ने इसके मेल-टाइगर होने की पुष्टि करते हुए बताया कि यह एक वयस्क टाइगर है, और वन विभाग अभी भी कैमरे के जरिये इसकी निगरानी कर रहा है। इसे पकडऩे की फिलहाल कोई योजना नहीं है क्योंकि राष्ट्रीय पशु एवं संरक्षित पशु होने के चलते टाइगर के लिए कुछ प्रोटोकॉल बने हुए हैं। चूंकि अभी तक इस टाइगर ने कोई जनहानि नहीं पहुंचाई है। इसलिए इसे पकड़ा नहीं जाएगा, सिर्फ निगरानी रखी जाएगी। अहतियात के तौर पर वन एवं राजस्व विभाग के द्वारा कसारबरड़ी एवं आसपास के गांव के लोगों को घरों में रहने, अपने खेतों एवं खलिहानों में न जाने, नदी-नालों पर जाने से बचने की सलाह दी गई है। वन विभाग को उम्मीद है कि अगले कुछ घंटों में यह अपने अगले सफर की ओर निकल जाएगा।
नागदा गांव में एक साल रहने के बाद भटका है टाइगर
कसारबरड़ी गांव में वन विभाग की टीम की मदद के लिए उज्जैन से कसारबरड़ी पहुंचे वाइल्ड लाइफ एक्सपोर्ट और वन विभाग के कंस्लटेंट विवेक पगारे ने बताया कि यह टाइगर मेल-टाइगर है तथा देवास से 8 किमी दूर नागदा गांव से सटे जंगलों में तकीरबन एक साल तक रहा है और वहां रहने के दौरान इस टाइगर ने वहां के ग्रामीणों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया था तथा वहां के ग्रामीण इस टाइगर से इसलिए खुश थे क्योंकि इस टाइगर के चलते उनके खेतों का सफाया करने वाली नीलगाय से उन्हें मुक्ति मिल गई थी तथा चोर-बदमाश भी उनके गांव की ओर रुख नहीं करते थे। विवेक पगारे के अनुसार यह नागदा से भटकता हुआ उज्जैन, बदनावर होते हुए कसारबरड़ी आ गया है और यह अब सुरक्षित ठिकाने की तलाश में है। सुरक्षित ठिकाना जहां उसे महसूस होगा, उस दिशा में वह चला जाएगा।
यह है बाघों की देश-प्रदेश में स्थिति-
टाइगर भारत का राष्ट्रीय पशु है, और 2014 की टाइगर गणना के दौरान देश में कुल 2, 226 टाइगर पाए गए थे जिनमें सबसे अधिक कर्नाटक में 408, उसके बाद उत्तराखंड में 340, मध्यप्रदेश में 308 दर्ज हुए थे। टाइगर की आबादी के लिहाज से मध्यप्रदेश देश में तीसरे नंबर पर है।
यह है टाइगर प्रोटोकॉल-
टाइगर प्रोटोकॉल के तहत अगर टाइगर किसी इलाके में आता है कोई भी सूचना डीएफओ द्वारा सीसीएफ इंदौर को दी जाती है, और यदि यह टाइगर लगातार किसी एक इलाके में रहकर जनहानि करता है या आदमखोर बन जाता है तो फिर उसकी सूचना डीएफओ द्वारा व्हाया सीसीएफ, पीसीसीएफ (प्रधान मुख्य वन संरक्षक) को भेजी जाती है और वहां से अनुमति मिलने के बाद उसे पकडऩे की प्रक्रिया जंगले लगाकर की जाती है। चूंकि अभी किसी तरह की जनहानि नहीं हुई है इसलिए वन विभाग सिर्फ निगरानी करेगा और उसे पकडऩे की कोशिश नहीं होगी।