कोर्ट के स्टे की आड़ में अवैध क्लिनिक फिर चालू! 26 जनवरी से पहले चंद्रशेखर आज़ाद नगर में कानून बेबस या लाचार?

0

कोर्ट के स्टे की आड़ में अवैध क्लिनिक फिर चालू! 26 जनवरी से पहले चंद्रशेखर आज़ाद नगर में कानून बेबस या लाचार?

भूपेंद्र चौहान, चंद्रशेखर आज़ाद नगर

एक ओर देश 26 जनवरी गणतंत्र दिवस की तैयारियों में जुटा है, संविधान, कानून और नागरिक अधिकारों की बातें हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर चंद्रशेखर आज़ाद नगर में अवैध क्लिनिक और झोलाछाप डॉक्टरों का नेटवर्क प्रशासन को खुली चुनौती देता नजर आ रहा है।

इलाज के नाम पर मरीजों की जान जाने के बाद भी कई मामलों को चुपचाप दबा दिया गया, लेकिन अब जो तथ्य सामने आ रहे हैं, वे और भी गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

इस पूरे मामले पर जब सीएमएचओ डॉ. राहुल जायसवाल से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा—“हमने कार्रवाई कर दी है। संबंधित अस्पताल ने कोर्ट से स्टे ले लिया है। अब वह चले या न चले, इस पर हम तब तक कुछ नहीं कर सकते जब तक कोर्ट का जवाब नहीं आ जाता।”

इस बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या कोर्ट के स्टे की आड़ में अवैध क्लिनिकों को खुली छूट मिल गई है? क्या एक बार स्टे मिलते ही अवैध गतिविधियां दोबारा सुचारू रूप से चलने लगेंगी? स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन क्लिनिकों को प्रशासन ने पहले सील किया था, वे अब फिर से खुल चुके हैं और पहले की तरह मरीजों का इलाज किया जा रहा है। न योग्यता की जांच, न पंजीयन की पुष्टि और न ही किसी प्रकार की निगरानी। यह स्थिति सीधे-सीधे आम नागरिकों की जान को जोखिम में डालने जैसा है।

जनता पूछ रही है—क्या प्रशासन केवल फाइलों में कार्रवाई कर रहा है? क्या मरीजों की मौत के बाद भी जिम्मेदारी तय नहीं होगी? और क्या अब अगली मौत के बाद कहा जाएगा कि “मामला कोर्ट में था”?

26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्व के मौके पर जब संविधान की सर्वोच्चता की बातें हो रही हैं, उसी समय चंद्रशेखर आज़ाद नगर में अवैध क्लिनिक कानून, प्रशासन और मानवता—तीनों पर सवालिया निशान बन चुके हैं।

अब जरूरत है कि केवल स्टे का हवाला देकर जिम्मेदारी से पल्ला न झाड़ा जाए, बल्कि अवैध क्लिनिकों की कड़ी निगरानी। मरीजों की मौत के मामलों की स्वतंत्र जांच और दोषियों पर स्थायी व उदाहरणात्मक कार्रवाई की जाए। वरना जनता यही मानेगी कि अवैध क्लिनिकों को मौन संरक्षण प्राप्त है, और कानून सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह गया है।

एसडीएम निधि मिश्रा से चर्चा की तो उनका कहना था CMHO को कार्रवाई करना चाहिए। जबकि BMO डॉक्टर राहुल जायसवाल से चर्चा किंतु उन्होंने कहा कि मैं SIR के काम में व्यस्त हूं।

Leave A Reply

Your email address will not be published.