नेशनल हाईवे के निर्माण के लिए तय हो रहा मुआवजा, लेकिन फिर भी सड़क के आसपास लगा रहे बिजली के पोल व तार

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भूपेंद्र चौहान, चंद्रशेखर आज़ाद नगर 

नेशनल हाईवे 56 आम्बुआ से सेजावाड़ा के बीच क्षेत्र में प्रस्तावित टू लेन सड़क स्वीकृत है। इसके बावजूद सड़क के आसपास बिजली के पेाल शिफ्टिंग किए जा रहे है। जबकि अभ्ज्ञी इस सड़क निर्माण के लिए मुआवजे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। तहसीलदार और एसडीएम कार्यालय यह तय कर रहे हैं कि किसे तना मुआवजा दिया जाएगा और कौन-सी संरचना कहां शिफ्ट की जाएगी। इसके बावजूद उसी क्षेत्र में पुराने मार्ग के ऊपर नए बिजली के पोल और बिजली के तार लगाए जा रहे हैं, जिससे सरकारी धन की बर्बादी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

स्थानीय नागरिकों के अनुसार जिस स्थान पर आगे चलकर शिफ्टिंग होना लगभग तय माना जा रहा है, वहीं बिजली विभाग द्वारा नया ढांचा खड़ा किया जा रहा है। यह स्थिति प्रशासनिक निर्णयों और जमीनी क्रियान्वयन के बीच स्पष्ट विरोधाभास को दर्शाती है।  सूत्रों का कहना है कि शिफ्टिंग और मुआवजे की प्रक्रिया अभी जारी है। अधिकारी यह निर्धारण कर रहे हैं कि कौन-सा बिजली पोल, तार या अन्य ढांचा हटाया जाएगा और उसके बदले कितनी राशि दी जाएगी। इसके बावजूद नए बिजली पोल और तार स्थापित करना जनता के पैसों की खुली बर्बादी माना जा रहा है।

चर्चा के दौरान यह बात भी सामने आई है कि भविष्य में जब शिफ्टिंग होगी, तब इन्हीं नए लगाए गए बिजली पोल और तारों को हटाकर दोबारा भुगतान किया जाएगा। यदि ऐसा हुआ तो यह मामला डबल भुगतान और गंभीर वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आएगा।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि एक ओर मुआवजा राशि तय की जा रही है दूसरी ओर शिफ्टिंग की योजना बनाई जा रही है ठेकेदार अनिल देसला का कहना है की आगे चलकर शिफ्टिंग होना है तो हम उसे काम को जल्दी से पूरा करने का अधिकारियों का दबाव है क्योंकि यह कार्य पहले से स्वीकृत कार्य है। इसी दौरान नए बिजली पोल व तार लगाए जा रहे हैं। जब इस पूरे मामले पर संबंधित विभाग के अधिकारी से स्पष्ट  जवाब मांगा गया, तो कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई। जवाबों में टालमटोल और अस्पष्टता ने संदेह को और गहरा कर दिया है।

जनता के सवाल

जब शिफ्टिंग पहले से तय है तो नए बिजली पोल और तार क्यों लगाए जा रहे हैं?

क्या शिफ्टिंग के नाम पर दोबारा भुगतान की योजना बनाई जा रही है?

इस निर्णय की अनुमति किस अधिकारी ने दी और उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

मामला सीधे तौर पर सरकारी धन, प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा हुआ है। ऐसे में स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच की चर्चा जोरों पर  है, ताकि यदि कहीं गड़बड़ी है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों पर सख़्त कार्रवाई हो सके।

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