मुक्तिधाम बदहाली का शिकार, सौंदर्यीकरण के लिए स्वीकृत हुई राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी

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जितेंद्र वाणी, नानपुर

आलीराजपुर जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत नानपुर का मुक्तिधाम आज अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। वर्षों से बुनियादी सुविधाओं के अभाव और प्रशासनिक अनदेखी के कारण हिंदू समाज के सभी वर्गों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि मुक्तिधाम के विकास के लिए स्वीकृत लाखों रुपये की राशि और जनता द्वारा जुटाया गया चंदा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया, जिससे जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं हुआ।

बाउंड्रीवॉल और सुरक्षा का अभाव

मुक्तिधाम में वाल बाउंड्री नहीं होने के कारण यहां आवारा पशुओं का जमावड़ा रहता है और जगह-जगह गंदगी व कटीली झाड़ियां उगी हुई हैं। वाणी समाज के अध्यक्ष डॉ. रजनीकांत वाणी ने बताया कि बाउंड्रीवॉल और गेट न होने की वजह से मुक्तिधाम की सामग्री भी चोरी हो जाती है। उन्होंने मांग की है कि ग्राम पंचायत जल्द से जल्द इसका निर्माण कार्य पूर्ण करवाए।

बिजली-पानी की किल्लत और आर्थिक बोझ

मुक्तिधाम में न तो बिजली की व्यवस्था है और न ही पानी की। इस बदहाली का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। माली समाज के अध्यक्ष गजानंद माली के अनुसार, सुविधाओं के अभाव में मजबूरन लोगों को अंतिम संस्कार के लिए धार जिले के कोटेश्वर (नर्मदा तट) जाना पड़ता है। एक अंतिम संस्कार के लिए गरीब परिवारों को 20 से 30 हजार रुपये तक का अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है, जो अत्यंत चिंताजनक है।

सामाजिक प्रतिष्ठा पर सवाल

नानपुर बड़ी जगह होने के बावजूद मुक्तिधाम की यह स्थिति स्थानीय निवासियों के लिए शर्मिंदगी का कारण बनी हुई है। राठौड़ समाज के अध्यक्ष राजेश राठौड़ ने कहा कि जब अन्य क्षेत्रों जैसे कुक्षी, बड़वानी, धार और जोबट के लोग यहां आते हैं, तो मुक्तिधाम की हालत देखकर वे कटाक्ष करते हैं। इससे समाज की छवि खराब हो रही है।

मुख्य समस्याएं एक नजर में:

  • बाउंड्रीवॉल का न होना: सुरक्षा और अतिक्रमण की समस्या।

  • भ्रष्टाचार के आरोप: कागजों में सौंदर्यीकरण, धरातल पर शून्य काम।

  • बिजली-पानी का अभाव: अंतिम संस्कार के दौरान भारी परेशानी।

  • साफ-सफाई की कमी: चारों ओर गंदगी और कांटों का साम्राज्य।

अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस गंभीर मुद्दे पर क्या संज्ञान लेते हैं या फिर नानपुर की जनता को इसी तरह अव्यवस्थाओं के बीच अपनों को विदा करना होगा।

सरपंच सकरी समरथ सिंह मौर्य से चर्चा की तो उन्होंने बताया ग्राम पंचायत में प्रस्ताव दे रखा है। नई गाइड लाईन के अनुसार जनप्रतिनिधियों से मांग रखी गई है।

 

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