ब्रजेश श्रीवास्तव, छकतला
विशाल हिंदू सम्मेलन में छकतला मंडल के ग्राम छकतला, बयडिया, कडवानिया, धोरट, जामली, भोपालिया से सैकड़ो की संख्या में माता-बहन बाल-गोपाल एवं हिंदू समाज वरिष्ठजनों की उपस्थिति रही। हिन्दू सम्मेलन में न केवल मातृशक्ति सहित सकल हिन्दू समाज की उत्साहपूर्वक भागीदारी हो रही है।
बल्कि साधु एवं सन्त महात्माओं द्वारा भी खुले हृदय से आशीर्वचन प्रदान किए जा रहे हैं। कुल मिलाकर इन हिन्दू सम्मेलन की सकल हिन्दू समाज द्वारा भूरि-भूरि प्रशंसा की जा रही है। इन सम्मेलन का आयोजन दरअसल सकल हिन्दू समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा मिलकर किया जा रहा है जिससे समाज के समस्त अंगों में आपस में भाईचारा पुष्ट हो । छोटे छोट आपसी मतभेद समाप्त हो एवं विशेष रूप से युवा नागरिकों को हिंदू सनातन संस्कृति के संस्कारों से अवगत होने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। इन हिन्दू सम्मेलन के आयोजन का उद्देश्य भी सनातन संस्कृति, सनातन धर्म और सामाजिक एकता को सुदृढ़ करना है, जिसकी प्राप्ति होती हुई दिख रही है।

कार्यक्रम की शुरुआत हनुमान चालीसा से की गई कार्यक्रम में महिला वक्त द्वारा पांच परिवर्तन के विषय पर अपना विषय प्रतिपादित किया जिसमें पर्यावरण, नागरिक अनुशासन, कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, स्व का बोध
सामाजिक वक्त के रूप में वगेसिंह सिंह पटेल ग्राम जामली ने अपने दिव्या ग्राम जामली की परिकल्पना को रखा एवं श्री रुमलिया जी आवासीय ने समाज को किस प्रकार से एकजुट रहना चाहिए एवं समाज को तोड़ने की लिए किया जा रहे हैं षड्यंत्र को सजक रहकर उसका मुंह तोड़ जवाब देने के लिए सब हिंदू समाज को एक होकर इस प्रकार के लोगों से लड़ने के लिए तैयार रहने का आव्हान किया कार्यक्रम के मुख्य वक्ता केतन सोजित्रा सह प्रांत( प्रचारक मालवा प्रांत) ने स्थानीय बोली व गुजराती में अपना वक्तव्य दिया उन्होंने कहा कि आज हिंदुत्व यदि सशक्त होता है तो यह न केवल भारत के लिए बल्कि पूरे विश्व के हित में होगा क्योंकि आज विश्व के विभिन्न देशों में फैली अशांति को दूर करने में केवल सनातन हिंदू संस्कृति ही सक्षम दिखाई दे रही है और इस विषय को विभिन्न देशों में फैले भारतीय मूल के नागरिकों के माध्यम से विकसित एवं अन्य देशों के नागरिक भलीभांति समझने लगे हैं क्योंकि इन देशों में निवासरत भारतीय मूल के नागरिक सनातन हिंदू संस्कृति के संस्कारों का अनुपालन करते हुए दिखाई देते हैं जिनमें “वसुधैव कुटुम्बकम” का भाव दिखाई देता है। इन देशों में समस्त भारतीय मूल के नागरिक शांतिपूर्वक अपना जीवन यापन करते हैं एवं वहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था में अपना सशक्त योगदान देते हुए दिखाई देते हैं। और फिर, भारत के भी आज विश्व के लगभग समस्त देशों के साथ दोस्ताना सम्बंध हैं, भारत ने कभी भी किसी देश की जमीन पर कब्जा करने के उद्देश्य से किसी देश के साथ युद्ध नहीं किया है। भारत सदैव से ही “जियो और जीने दो” के सिद्धांत का अनुपालन करता आया है। बल्कि, विश्व के अन्य देशों के नागरिक, जैसे, शक, हूण, कुषाण, पारसी, यहूदी, ईसाई एवं मुस्लिम भी भारत आकर आसानी से यहां रच बस गए हैं। आज पूरे विश्व में भारत ही एक ऐसा देश है जिसमें मुस्लिम समाज के समस्त फिर्के पाए जाते हैं।
